सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले की सरई नगर परिषद के कोनी गांव निवासी सीता बसोर पिछले छह महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं। उन्हें और उनके दिवंगत पति को लिपिकीय त्रुटि के कारण सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है।इस त्रुटि के कारण सीता का समग्र आईडी रिकॉर्ड हटा दिया गया, जिससे उन्हें मिलने वाली सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बंद हो गया है। इसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन भी शामिल है।

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सीता बसोर के अनुसार, उनके पति का निधन तीन वर्ष पूर्व हो चुका है। उन्हें पिछले छह महीने से राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया था। जब उन्होंने संबंधित कार्यालय में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनकी भी मौत दर्ज है, जिसके कारण उन्हें कोई भी सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।

पीड़िता का कहना है कि वह लगातार कई विभागों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारी उनकी बात सुनने के बजाय उनका उपहास करते हैं। इस स्थिति से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि कब तक उन्हें न्याय मिल पाता है और कागजों में वह कब तक जिंदा हो पाएंगी।

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हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि पिछले छह महीने से सरकारी योजनाओं से वंचित रही सीता बसोर को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी। प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा एक गरीब महिला को कब तक भुगतना पड़ेगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

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