मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. सावन माह के अंतिम सोमवार पर रामनगरी अयोध्या पूरी तरह शिवमय नजर आई. सुबह से ही सरयू घाटों से लेकर प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. चारों तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंजते रहे. सुबह करीब 3 बजे से ही शिवालयों के बाहर श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई.

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सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ पहुंचे भक्त

सावन के अंतिम सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सबसे पहले सरयू नदी पहुंचे. भक्तों ने पवित्र सरयू में स्नान कर पूजा-अर्चना की और इसके बाद हाथों में गंगाजल, बेलपत्र और फूल-माला लेकर नागेश्वरनाथ मंदिर की ओर रवाना हुए. मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने की थी. यही वजह है कि सावन के सोमवार पर यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.

सुबह से ही मंदिर के बाहर लंबी कतार

अंतिम सोमवार होने के कारण नागेश्वरनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. भक्त घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए. मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भोलेनाथ के जयकारों से गूंजता रहा. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और देश की खुशहाली की प्रार्थना की.

प्रशासन ने संभाली व्यवस्था

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए. मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई और चरणबद्ध तरीके से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया. चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा. सीसीटीवी कैमरों से भीड़ की निगरानी की गई. पुलिसकर्मी लगातार अनाउंसमेंट कर श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते रहे.

बोले श्रद्धालु- बाबा के दर्शन से पूरी होती है मनोकामना

सावन के अंतिम सोमवार पर अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला. भक्तों का कहना है कि सावन के आखिरी सोमवार को बाबा के दर्शन और जलाभिषेक का विशेष महत्व है. एक श्रद्धालु ने कहा कि वह हर साल सावन में अयोध्या आते हैं और अंतिम सोमवार पर नागेश्वरनाथ के दर्शन करना उनके लिए बेहद खास है.

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भक्तों के मुताबिक, बाबा से सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है. सरयू स्नान से लेकर शिवालय में जलाभिषेक तक पूरी रामनगरी में भक्ति का माहौल बना रहा. अंतिम सोमवार पर उमड़े इस आस्था के सैलाब ने अयोध्या को पूरी तरह शिवमय कर दिया.