अनमोल मिश्रा, सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के सोहावल विकासखंड अंतर्गत कोठी तहसील की ग्राम पंचायत मौहार में स्कूल भवन निर्माण को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिस विद्यालय भवन का निर्माण स्वीकृत स्थल पर होना था, उसे दूसरे स्थान पर बनवाया जा रहा है। इतना ही नहीं, निर्माण के लिए जिस भूमि का चयन किया गया है, वह नदी-नाले के जलभराव क्षेत्र में स्थित है, जहां बरसात के दौरान पानी का तेज बहाव रहता है। ऐसे स्थान पर भवन निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और निर्माण की गुणवत्ता व सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार विद्यालय भवन निर्माण का कार्य ग्राम पंचायत मौहार की सरपंच गीता कोरी के माध्यम से कराया जा रहा है, जबकि निर्माण का ठेका राखी सिंह को दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की मजबूत नींव तैयार करने के बजाय नदी की धार के बीच ही पिलर खड़े कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी स्थान पर भवन का निर्माण होता है तो बरसात के समय उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर आपत्ति दर्ज कराते हुए तहसील कार्यालय कोठी में शिकायत की थी। शिकायत के बाद तहसीलदार द्वारा संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य रोकने के लिए स्टे आदेश जारी किया गया। कोठी तहसीलदार प्रज्ञा दुबे के द्वारा आदेश क्रमांक 538 दिनांक 3 अगस्त 2026 को आदेश दिया। इसके बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्टे आदेश की अनदेखी करते हुए सरपंच और उनके समर्थकों ने निर्माण जारी रखा। विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ विवाद की स्थिति भी बनी।
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ग्रामीण रिंकू गौतम का कहना है कि विद्यालय भवन के लिए जिला शिक्षा केंद्र से राशि स्वीकृत हुई थी। यह भवन मूल रूप से दिरौंध के भरसियान टोला में स्वीकृत है, लेकिन उसे वहां न बनाकर मौहार पंचायत के बैरगला गांव में बनाया जा रहा है। आरोप है कि सरपंच द्वारा बताए गए स्थान को ही निर्माण स्थल मान लिया गया, जबकि वह श्मशान भूमि और नदी के जलभराव क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण स्थल के चयन से पहले किसी तकनीकी विभाग द्वारा भू-परीक्षण या सुरक्षा संबंधी जांच नहीं कराई गई। यदि स्थल का वैज्ञानिक परीक्षण होता तो नदी की धार में भवन निर्माण की अनुमति मिलना संभव नहीं था। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय भवन स्वीकृत स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर बनाया जा रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि तहसीलदार के स्टे आदेश के बावजूद निर्माण कार्य किसके निर्देश पर जारी रखा गया। यह मामला केवल निर्माण की अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि शासकीय धन के उपयोग, प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और बच्चों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। यदि नदी के जलभराव क्षेत्र में विद्यालय भवन का निर्माण किया जाता है तो भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब स्थानीय लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करता है या नहीं।
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