ज्ञान भारद्वाज, गाजियाबाद। बालाजी एनक्लेव गोविंदपुरम में स्थित निर्माण अधीन मकान पर इन दिनों गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस परिसर पर पूर्व में कई बार सीलिंग की कार्रवाई की गई, लेकिन भविष्य में हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार? देश और प्रदेश में हाल के वर्षों में कई अग्निकांड और भवन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

ऐसे में क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसी भी बहुमंजिला भवन में संरचनात्मक सुरक्षा, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाओं की जांच अत्यंत आवश्यक है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल बिल्डर की होगी या फिर उन अधिकारियों की भी तय होगी जिनके कार्यक्षेत्र में यह निर्माण लगातार आगे बढ़ता रहा ? इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय लगातार आगे बढ़ता रहा और लगभग चार मंजिल तक का ढांचा खड़ा दिखाई दे रहा है।

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कार्रवाई हुई थी तो उसका असर कहां गया

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्रवाई हुई थी तो उसका असर कहां गया? और यदि निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं था तो फिर बार-बार कार्रवाई के बावजूद निर्माण आगे कैसे बढ़ता रहा? सीलिंग हुई या सिर्फ औपचारिकता ? क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि जिस निर्माण पर कार्रवाई होने का दावा किया गया, वहीं आज बहुमंजिला ढांचा खड़ा दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सीलिंग के बाद भी निर्माण सामग्री आती रही, मजदूर काम करते रहे और मंजिलें बढ़ती रहीं, तो फिर सील लगे परिसर में भी खुलेआम काम जारी है।

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मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय

कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या सीलिंग केवल रिकॉर्ड पूरा करने की प्रक्रिया बनकर रह गई है या फिर मौके पर निगरानी की व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है? क्या जीडीए की कार्रवाई को खुली चुनौती? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanatth लगातार अवैध निर्माण और भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करते रहे हैं। प्रदेशभर में कई जगह बुलडोजर कार्रवाई और अवैध कब्जों पर कठोर कदम उठाए गए हैं। ऐसे में गोविंदपुरम का यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बार-बार कार्रवाई के बावजूद निर्माण नहीं रुकता, तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। जिम्मेदारी आखिर किसकी ? क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसी भी अवैध निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रीय अधिकारियों पर होती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं किः दोबारा सीलिंग के बाद भी निर्माण कार्य फिर शुरू हो गया। क्या संबंधित जेई नियमित निरीक्षण कर रहे थे? क्या एई और एक्सईएन को निर्माण की जानकारी नहीं थी? क्या प्रवर्तन शाखा को मौके की स्थिति से अवगत नहीं कराया गया? यदि जानकारी थी तो प्रभावी रोकथाम क्यों नहीं हुई?

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हालांकि इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। करोड़ों के राजस्व पर भी उठ रहे सवाल स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि किसी बहुमंजिला निर्माण में स्वीकृत मानचित्र, विकास शुल्क, कंपाउंडिंग शुल्क, फायर सुरक्षा और अन्य मानकों का पूर्ण अनुपालन नहीं होता, तो इससे सरकारी राजस्व को भी संभावित नुकसान पहुंच सकता है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि निर्माण किस स्वीकृति के आधार पर किया गया, कितनी मंजिलों की अनुमति थी और वर्तमान निर्माण उसकी तुलना में कितना है।

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सबसे बड़ा सवाल यदि किसी परिसर पर कई बार कार्रवाई हुई, फिर भी निर्माण चार मंजिल तक पहुंच गया, तो आखिर व्यवस्था की किस कड़ी में पूर्व में कई बार सीलिंग के बावजूद काम नहीं रुका। चूक हुई? यही सवाल आज गोविंदपुरम से उठकर पूरे गाजियाबाद में चर्चा का विषय बना हुआ है। उच्चस्तरीय जांच की मांग क्षेत्र के लोगों ने मांग की है किः पूरे निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए। स्वीकृत मानचित्र और वास्तविक निर्माण का मिलान कराया जाए। पूर्व में हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति की समीक्षा हो। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कठोर कार्रवाई की जाए।