शिखिल ब्यौहार, भोपाल। भोपाल में कोहराम मचा हुआ है। मामला रहवासी क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों में संचालन का है। जिम्मेदार से लेकर व्यापारी और जनता एक ही बात कह रहे हैं। मास्टर प्लान नहीं आने से शहर में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मिक्स लैंडयूस का प्रावधान था नहीं तो व्यापारी करते क्या। कोर्ट में तक दलील दी गईं। लेकिन लल्लूराम.कॉम पर ऐसा बड़ा खुलासा हुआ। दरअसल वर्तमान में लागू भोपाल मास्टर प्लान 2005 में ही मिक्स लैंडयूस का प्रावधान किया गया है। लेकिन जिम्मेदार विभाग, सरकारी अफसर और सरकार तीनों ने ही कभी अमल तो दूर बल्कि अध्ययन तक की जहमत नहीं उठाई।
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यदि वर्तमान मास्टर प्लान पर अमल किया जाता तो तय नियमों और प्रावधानों के तहत आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों का संचालन वैध तरीके से होता। वर्तमान में लागू भोपाल मास्टर प्लान 2005 में प्रावधान है कि ग्राउंड फ्लोर पर प्लॉट का 25% या 50 स्क्वायर मीटर जो भी काम होगा व्यावसायिक गतिविधि के लिए आवासीय में उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा भी कई नियम हैं। लेकिन लापरवाही की हद देखिये कि सब कुछ होकर भी नजर अंदाज किया गया। नए मास्टर प्लान लाने की मांग एक स्वर में की जा रही है। जबकि नए मास्टर प्लान की आवश्यकता ही नहीं। क्योंकि वर्तमान मास्टर प्लान 2005 भोपाल की अनुमानित 25 लाख की आबादी के हिसाब से तैयार किया गया। अभी इस आबादी तक भोपाल को पहुंचने के लिए सालों का इंतजार करना होगा।
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मामले पर सियासत भी जोर पकड़ रही है। मामले पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि सरकार के पढ़े-लिखे अफसर भी अनपढ़ हो गए हैं। भोपाल के मौजूदा 2005 मास्टर प्लान के अनदेखी में षड्यंत्र की बू आ रही है। सरकार व्यापारियों के नाम पर कैचमेंट की जमीन और लैंड उसे के नाम पर बड़ा फेरबदल करना चाहती है। यह घूसखोरी का एक बड़ा खेल है। लिहाजा व्यापारियों की सीलिंग एक्ट के मामले को लेकर कांग्रेस शासन काल में बने मास्टर प्लान प्रावधानों को उजागर नहीं किया गया। सरकार के अधिकारियों और बीजेपी ने मास्टर प्लान को लेकर गुमराह किया। उन्होंने कहा कि इस खुलसी के बाद नए मास्टर प्लान की आवश्यकता ही नहीं है। उधर, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता महेश शर्मा ने कहा कि व्यवस्थित शहरी विकास के लिए मास्टर प्लान लाया जा रहा है। वर्तमान मास्टर प्लान के प्रावधानों को भी देखा जाएगा और उसे आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा।
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