अनिल मालवीय, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार तड़के रात्रिकालीन ड्यूटी से डॉक्टर के नदारद रहने के कारण एक नवजात शिशु को अपनी जान गंवानी पड़ी। एक तरफ जहां सरकारें संस्थागत प्रसव और जच्चा-बच्चा सुरक्षा पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सीहोर के इस सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की अमानवीय लापरवाही ने एक दिव्यांग मां की गोद को हमेशा के लिए सूना कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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तड़पकर दम तोड़ गया मासूम… परिजनों का आरोप: ‘अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था’

इस दर्दनाक हादसे के पीछे अस्पताल प्रबंधन की जो घोर लापरवाही सामने आई है, वह रूह कंपा देने वाली है। ग्राम सारस निवासी महिमा कलम जो एक पैर से दिव्यांग हैं, को गुरुवार सुबह करीब 4 बजे प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था।

प्रसव के बाद महिमा ने एक सुंदर नवजात को जन्म दिया। वह मासूम करीब एक से डेढ़ घंटे तक जीवित रहा। परिजनों का आरोप है कि इस बेहद नाजुक और संवेदनशील समय में अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। पूरा उपचार केवल नर्स के भरोसे छोड़ दिया गया। समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर का उचित इलाज न मिलने के कारण सुबह लगभग 6 से 6:30 बजे के बीच मासूम नवजात ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

सरपंच प्रतिनिधि ने दी सूचना तब जागा प्रशासन

घटना के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। नवजात की मौत की जानकारी मिलते ही सरपंच प्रतिनिधि राजेश जांगड़े तुरंत अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। सरपंच प्रतिनिधि ने रात्रिकालीन ड्यूटी में डॉक्टर की अनुपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई और इस अमानवीय लापरवाही की सूचना तुरंत बीएमओ नवीन मेहर को दी।

सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे बीएमओ ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में चल रहे कई अन्य काले कारनामों का भी भंडाफोड़ हुआ।

डिलीवरी के बाद रिश्वतखोरी, सरकारी बिजली की चोरी

इस दुखद घटना ने अस्पताल के भीतर चल रही कई अन्य गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से भी पर्दा उठा दिया है। अस्पताल में डिलीवरी के बाद गरीब मरीजों और उनके परिजनों से कथित रूप से पैसे ऐंठने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

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अस्पताल में सरकारी दवाएं होने के बावजूद डॉक्टरों द्वारा मरीजों को जबरन बाहर की महंगी दवाएं लिखने की शिकायतें भी बीएमओ तक पहुंची हैं। हद तो यह है कि अस्पताल के मुख्य बिजली मीटर से सीधे कर्मचारियों के क्वार्टर्स में अवैध रूप से बिजली दौड़ाई जा रही थी।

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