अनिल मालवीय, इछावर। सीहोर जिले की इछावर तहसील के ग्राम बृजेश नगर में सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL का एक बेहद असंवेदनशील और हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। यहां सरकारी तंत्र की कंगाली और अधिकारियों की लापरवाही का शिकार एक दिव्यांग परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गया है। सालों से बंद पड़े BSNL के कबाड़ टावर का न तो किराया दिया जा रहा है और न ही उसकी रखवाली करने वाले दिव्यांग के परिवार को मानदेय मिला है। अब स्थिति यह है कि जंग खा चुका यह भारी भरकम टावर कभी भी गिरकर किसी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकता है।
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वादे हजार, हकीकत में सिर्फ अंधकार
दोनों पैरों से दिव्यांग भरत वर्मा आज अपनी ही जमीन पर लगे BSNL के टावर को देखकर खून के आंसू रोने को मजबूर हैं। पीड़ित के अनुसार, जब विभाग को यहाँ टावर लगाना था, तब अधिकारियों ने बड़े-बड़े वादे किए थे। भरोसा दिलाया गया था कि जमीन का मोटा किराया मिलेगा और परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार (मानदेय) दिया जाएगा। शुरुआत में कुछ समय सब ठीक रहा, लेकिन जैसे ही टावर खड़ा हुआ, विभाग कुंभकर्णी नींद सो गया।
न किराया मिला, न मानदेय; दाने-दाने को तरस रहा परिवार
सालों से यह टावर बंद पड़ा है और कबाड़ में तब्दील हो चुका है। BSNL ने न तो जमीन का लंबित किराया चुकाया है और न ही रखवाली करने वाले दिव्यांग के परिवार का मानदेय दिया है। अपनी ही जमीन होने के बावजूद पीड़ित परिवार वहाँ न तो खेती कर पा रहा है और न ही रहने के लिए मकान बना पा रहा है। आर्थिक तंगी के चलते पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो चुका है।
जंग खाए टावर से हादसे का डर, जिम्मेदार कौन?
सालों से इस भारी-भरकम लोहे के ढांचे का कोई मेंटेनेंस (रखरखाव) नहीं किया गया है। पूरे टावर में जंग लग चुकी है और यह बेहद जर्जर स्थिति में है। ग्रामीणों का कहना है कि यह टावर कभी भी गिर सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यह ढांचा किसी के घर या राहगीर पर गिरा और कोई जनहानि हुई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन किसी की मौत का इंतजार कर रहा है?
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दफ्तरों के चक्कर काट थक चुका है दिव्यांग
पीड़ित दिव्यांग भरत वर्मा न्याय के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। दर्जनों आवेदन देने के बाद भी साहब लोगों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है। एक तरफ सरकार दिव्यांगों के कल्याण और ‘डिजिटल इंडिया’ के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत में एक दिव्यांग के अधिकारों का सरेआम हनन किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस खतरनाक ढांचे को हटाकर पीड़ित परिवार का बकाया भुगतान कब करता है, या फिर यह मामला फाइलों में ही दबा रहेगा।

