हेमंत शर्मा, इंदौर। खजराना क्षेत्र में पड़ोसी विवाद से जुड़े एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मारपीट के एक मामले में गलत प्रक्रिया अपनाते हुए युवक को सीधे जेल भेजने और अदालती आदेशों के पालन में देरी करने पर हाईकोर्ट ने खजराना एसीपी (ACP) को सख्त फटकार लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख इतना तल्ख रहा कि हाईकोर्ट ने एसीपी से सीधा सवाल करते हुए पूछा-“आपको इंदौर में ड्यूटी करना है या नहीं?”

हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

एसीपी की व्यक्तिगत पेशी: पुलिस कार्रवाई और प्रक्रियात्मक चूक के चलते एसीपी को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में न्यायिक प्रक्रिया का पालन होना ही चाहिए। पुलिस अपनी मर्जी से कानूनी नियमों को ताक पर नहीं रख सकती। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी थानों में हाईकोर्ट के आदेशों का समयबद्ध और सही तरीके से पालन सुनिश्चित करने के लिए एक अलग (Dedicated) सेल का गठन किया जाए।

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समयबद्धता पर सख्ती

अदालती आदेशों के क्रियान्वयन में होने वाली देरी पर भी कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली और वैधानिक प्रक्रियाओं के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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