टेलीग्राम ऐप (Telegram) इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने टेलीग्राम की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस तेजस करिया ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 69A के तहत जारी आदेश को चुनौती देने वाली टेलीग्राम की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार का कदम सही है। इसके साथ ही 22 जून तक टेलीग्राम को ब्लॉक करने का फैसला जारी रहेगा। सरकार ने सुरक्षा और परीक्षा से जुड़े मामलों को देखते हुए टेलीग्राम पर यह कार्रवाई की थी। टेलीग्राम ने अदालत में दलील दी थी कि इस फैसले से भारत में उसके करीब 15 करोड़ यूजर्स प्रभावित होंगे, लेकिन हाई कोर्ट ने फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग को स्वीकार नहीं किया।
यह याचिका टेलीग्राम की ओर से दायर की गई थी, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत जारी ब्लॉकिंग आदेश को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस करिया ने टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता से सवाल किए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की दलील को समझने के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि क्या चुनौती आपात स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार की शक्ति के स्वरूप और उसके इस्तेमाल को लेकर है।
अदालत ने यह भी कहा कि टेलीग्राम की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि किसी विशेष जानकारी या सामग्री को रोकने की जरूरत है तो उसे ब्लॉक किया जा सकता है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म की सेवाओं को प्रतिबंधित करना अलग विषय है। सुनवाई के दौरान टेलीग्राम और केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गईं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत जारी ब्लॉकिंग आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
Telegram सेवाओं को अस्थायी रूप से रोकने के केंद्र सरकार के फैसले का बचाव करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि ब्लॉकिंग आदेश तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया था। केंद्र की ओर से दलील देते हुए मेहता ने कहा कि इस आदेश की बाद में कैबिनेट सचिवालय के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने भी समीक्षा की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि आदेश जारी करने से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि अधिकारियों के पास ऐसे पर्याप्त इनपुट और सामग्री मौजूद थी, जिनसे संकेत मिलता था कि परीक्षा में गड़बड़ी के लिए प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से आग्रह किया कि मामले में व्यापक जनहित को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि ब्लॉकिंग ऑर्डर पूरी तरह से वैध प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था और इसमें कार्रवाई के कारणों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था। अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया कि टेलीग्राम की चुनौती मामले के तथ्यों के आधार पर उचित नहीं है और यह प्रोपोर्शनैलिटी (अनुपातिकता) के सिद्धांत पर भी खरी नहीं उतरती। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी बड़े नुकसान के होने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि खतरे की आशंका को देखते हुए समय रहते रोकथाम की कार्रवाई करनी चाहिए।
वेंकटरमणी ने अदालत में कहा, “अगर हमारे जैसे देश में रोकथाम की कार्रवाई नहीं की जा सकती तो हम कहां जाएंगे?” उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को कदम उठाने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि टेलीग्राम का इस्तेमाल आतंकवाद, साइबर अपराध और ड्रग तस्करी जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। सरकार ने अपने जवाबी हलफनामे में दावा किया कि इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अपराधियों के बीच संपर्क का माध्यम बन रहा है और इसका गलत इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। केंद्र ने ये दलीलें टेलीग्राम की उस याचिका के विरोध में दीं, जिसमें टेलीग्राम ने NEET-UG री-एग्जाम से पहले 22 जून तक भारत में अपनी सेवाओं को रोकने के फैसले को चुनौती दी है।
Telegram नया डार्क वेब बन गया
केंद्र ने कहा है कि टेलीग्राम अब एक तरह से “नया डार्क वेब” बनता जा रहा है, जिसका इस्तेमाल थ्रेट एक्टर्स और अपराधी नेटवर्क कर रहे हैं। केंद्र की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट में कहा गया कि अपराधियों ने टेलीग्राम के जरिए डीप वेब लिंक और डार्क वेब फोरम से जुड़े चैनलों पर लिंक साझा करना शुरू कर दिया है। सरकार का दावा है कि इस तरह के इस्तेमाल से जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है।
केंद्र सरकार के अनुसार, टेलीग्राम का इस्तेमाल आतंकवाद, साइबर अपराध और ड्रग तस्करी जैसी गतिविधियों में भी किया जा रहा था। इसी आधार पर सरकार ने प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने का फैसला लिया। दरअसल, केंद्र का यह कदम NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़ी चिंताओं के बाद उठाया गया था। सरकार का आरोप है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी करने वाले संगठित नेटवर्क ने टेलीग्राम का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद मई 2026 में आयोजित परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत निर्देश जारी किया, जिसके तहत 22 जून तक भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म की पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।
अधिकारियों ने क्या तर्क दिए?
सरकार के एक अन्य आदेश के तहत टेलीग्राम को पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के लिए मैसेज एडिट करने की सुविधा 30 जून तक बंद रखने का निर्देश दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम NEET-UG 2026 की 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया। केंद्र ने अदालत में दलील दी कि टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल कथित तौर पर लीक या फर्जी प्रश्न पत्रों के प्रसार, धोखाधड़ी और संदेशों के टाइमस्टैम्प में बदलाव जैसे कामों के लिए किया जा रहा था। सरकार का आरोप है कि प्लेटफॉर्म की एडिट सुविधा का दुरुपयोग कर पुराने संदेशों में बदलाव किए जा सकते थे, जिससे जांच एजेंसियों के लिए डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करना मुश्किल हो सकता था।
वहीं, टेलीग्राम ने अपनी ओर से बचाव करते हुए कहा कि उसने गैर-कानूनी NEET से जुड़े 900 से ज्यादा लिंक हटा दिए हैं। कंपनी ने बताया कि संदिग्ध और नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग टूल्स और मैनुअल मॉडरेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने अब टेलीग्राम की याचिका के जवाब में अपना पक्ष दाखिल कर दिया है और ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को जनहित और परीक्षा की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।
‘NEET माफिया’ नाम का Telegram चैनल
सरकार ने कहा है कि जांच के दौरान ‘नीट माफिया’ नाम का एक टेलीग्राम चैनल सामने आया था, जिसके करीब 18,617 सब्सक्राइबर थे। केंद्र के अनुसार, यह चैनल कथित तौर पर NEET परीक्षा पेपर लीक, एडवांस बुकिंग व्यवस्था, भुगतान प्रणाली और परीक्षा से जुड़े सामग्री उपलब्ध कराने के दावों से संबंधित कंटेंट साझा कर रहा था। सरकार ने अदालत में कहा कि इस तरह के चैनल बड़े पैमाने पर परीक्षा से जुड़ी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं। काउंटर एफिडेविट में केंद्र ने तर्क दिया कि इस चैनल की पहुंच यह दिखाती है कि टेलीग्राम के जरिए एक ही समय में बड़ी संख्या में यूजर्स तक गैरकानूनी परीक्षा सामग्री पहुंचाई जा सकती है।
सरकार ने यह भी कहा कि टेलीग्राम का तकनीकी ढांचा, जो क्लाउड आधारित है, बड़ी मात्रा में कंटेंट के तेजी से प्रसारण की सुविधा देता है। केंद्र के मुताबिक, यही तकनीकी क्षमता गलत इस्तेमाल की स्थिति में जांच एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। केंद्र सरकार ने इन्हीं दलीलों के आधार पर टेलीग्राम सेवाओं पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को उचित ठहराया है। वहीं, टेलीग्राम ने हाई कोर्ट में अपनी याचिका में कहा है कि पूरे प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करने के बजाय संदिग्ध सामग्री या विशेष अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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