नारनौल। गांव मोहनपुर निवासी शहीद नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव पहुंचा। वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ शहीद भूपेंद्र सिंह को अंतिम विदाई दी गई।
जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए दिया सर्वोच्च बलिदान
करीब 40 वर्षीय नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह भारतीय सेना की 2 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में अग्रिम सीमा पर थी। ड्यूटी के दौरान हिम शौर्य ऑपरेशन में देश की रक्षा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।
परिवार को दो-तीन दिन पहले उनकी शहादत की सूचना मिली थी। खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
23 साल पहले सेना में हुए थे भर्ती
शहीद के चचेरे भाई ने बताया कि भूपेंद्र सिंह करीब 23 वर्ष पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि परिवार में सेना की सेवा की लंबी परंपरा रही है।
शहीद के पिता सूबेदार रोहतास सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं परिवार के तीनों भाई रोहतास सिंह, हवा सिंह और दलीप सिंह भारतीय सेना में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। इसी सैन्य परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भूपेंद्र सिंह ने भी अपना जीवन देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
पीछे छोड़ गए पत्नी और दो बेटियां
भूपेंद्र सिंह अपने परिवार में छोटे बेटे थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी 19 वर्ष की है और बीटेक की पढ़ाई कर रही है। वहीं छोटी बेटी महज 7 साल की है और दूसरी कक्षा में पढ़ती है।
पिता की शहादत से दोनों बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम दर्शन के दौरान वहां मौजूद हर आंख नम नजर आई।
सेना के जवानों ने दी अंतिम सलामी
शहीद भूपेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों ने कहा कि भूपेंद्र सिंह ने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव और जिले का नाम गौरवान्वित किया है। देश की रक्षा करते हुए दिया गया उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने भी उनके प्रति लोगों के सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को दिखाया। उनकी शहादत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं देश के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान पर क्षेत्रवासियों को गर्व है।
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