देवघर। राजकीय श्रावणी मेला 2026 में इस बार श्रद्धालुओं की गिनती के लिए अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण करने वाले कांवरियों की सटीक संख्या दर्ज करने के लिए दुम्मा से लेकर मंदिर परिसर और कतार मार्ग के अंतिम छोर कुमैठा तक 150 एआई आधारित फेस रीडिंग हेड काउंटिंग कैमरे लगाए गए हैं।
इन कैमरों की मदद से न सिर्फ श्रद्धालुओं की संख्या दर्ज की जा रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी कांवरिये की दोबारा गिनती न हो। इससे प्रशासन को वास्तविक और सटीक आंकड़े तत्काल उपलब्ध हो रहे हैं।
चारों मार्गों से आने वाले श्रद्धालुओं की होगी सटीक गणना
श्रावणी मेले में श्रद्धालु पैदल कांवर यात्रा, रेल, सड़क और हवाई मार्ग से देवघर पहुंचते हैं। पैदल आने वाले कांवरियों की गिनती के लिए दुम्मा में 10 और शिवगंगा क्षेत्र में 8 हेड काउंटिंग कैमरे लगाए गए हैं।
इसके अलावा बाबा बैद्यनाथ मंदिर के सभी प्रमुख प्रवेश और निकास द्वारों पर 10 कैमरे स्थापित किए गए हैं। वहीं संस्कार मंडप, क्यू कॉम्प्लेक्स, नेहरू पार्क और कतार के अंतिम छोर कुमैठा तक 122 फेस रीडिंग कैमरे श्रद्धालुओं की लगातार निगरानी और गणना कर रहे हैं।
मैन्युअल गिनती से AI तकनीक तक का सफर
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की गिनती की व्यवस्था समय के साथ लगातार आधुनिक होती गई है। शुरुआत में सांख्यिकी विभाग के अधिकारी मंदिर खुलने से बंद होने तक मैन्युअल तरीके से गणना करते थे।
इसके बाद टाइम स्लॉट कार्ड व्यवस्था लागू हुई। फिर श्रद्धालुओं को रिस्ट बैंड दिए जाने लगे। बाद में एक्सिस कार्ड सिस्टम शुरू किया गया, जिसमें बिहार से झारखंड की सीमा में प्रवेश करते समय कांवरियों की फोटो लेकर उन्हें कार्ड जारी किया जाता था। यह व्यवस्था करीब एक दशक तक प्रभावी रही।
श्रद्धालुओं की गिनती अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी हो गई
अब इन सभी प्रणालियों की जगह एआई आधारित फेस रीडिंग और हेड काउंटिंग सिस्टम ने ले ली है, जिससे श्रद्धालुओं की गिनती अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी हो गई है।
प्रशासन का मानना है कि नई डिजिटल तकनीक से श्रावणी मेले के संचालन, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।


