Dharm Desk – भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर धर्म प्रेमियों में खास उत्साह है। इस दिन उपवास रखने के साथ रात में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना की जाती है। गृहस्थ परिवारों में मध्यरात्रि के समय कान्हा का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। ऐसे में पूजा से पहले जन्माष्टमी की तिथि, शुभ समय और पूजन विधि के बारे में जान लेना बहुत जरूरी हो जाता है।

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी कारण से जन्माष्टमी की पूजा में रात के समय का विशेष महत्व होता है। जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद उपवास का संकल्प लिया जाता है। भक्तजन दिनभर भगवान का ध्यान और भजन करते हैं और रात में जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी करते हैं। घर के पूजा स्थान को फूलों और सजावटी सामग्री से सजाकर बाल गोपाल को सुंदर वस्त्र पहनाए जाते हैं।

जन्माष्टमी पूजा विधि

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी समय भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।जन्म के समय शंख और घंटियां बजाकर भगवान का स्वागत किया जाता है। इसके बाद बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराकर नए कपड़े पहनाए जाते हैं। उन्हें माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्विक पदार्थों का भोग लगाया जाता है।
पूजा के लिए सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को साफ करके पूजा स्थान पर स्थापित करें। दीपक जलकर भगवान का ध्यान करें और श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप करें। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कराकर उन्हें वस्त्र, आभूषण, फूल और तुलसी दल अर्पित करें।

माखन, मिश्री कान्हा के भोग में रखें

माखन, मिश्री कान्हा को अति प्रिय है इसलिए इसे भोग में शामिल किया जाता है। पूजा पूरी होने के बाद श्रीकृष्ण की आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।

जन्माष्टमी पर इन बातों का रखें ध्यान

जन्माष्टमी के दिन पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। उपवास रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्रत करें और पर्याप्त पानी लेते रहें। पूजा में सात्विक सामग्री का प्रयोग करें। भगवान को भोग लगाने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। जन्माष्टमी केवल व्रत और पूजा का त्योहार नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी मनाने का अवसर भी है। परिवार के सभी जन मिलकर भजन आरती और जन्मोत्सव में शामिल होकर इस पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मना सकते हैं।