सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 59 साल पुराने एक मदरसे के अवैध हिस्से को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव में हुई इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने मदरसे के 7 कमरे, एक दुकान और आधे हॉल को गिरा दिया.

बताया गया कि यह मदरसा सरकारी जमीन पर बना था. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए 5 थानों की पुलिस फोर्स और करीब 100 जवान तैनात रहे. सुबह करीब 7 बजे SDM समेत प्रशासनिक अधिकारी 6 बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की.

14 हजार स्क्वायर फीट में बना था मदरसा, कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

प्रशासन के अनुसार पिपरा रामलाल गांव में स्थित ‘मकतब मदरसा’ करीब 14 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में बना हुआ था. सरकारी रिकॉर्ड में मदरसे की करीब 9 हजार स्क्वायर फीट जमीन खेल के मैदान के रूप में दर्ज है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर साल 2022 में पांच ग्रामीणों ने डुमरियागंज तहसीलदार कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी. मामले की सुनवाई के बाद साल 2023 में बेदखली का आदेश जारी किया गया था.

14 अगस्त को डीएम कोर्ट ने बरकरार रखा था आदेश

मदरसे के केयरटेकर अब्दुल सलाम ने तहसीलदार कोर्ट के आदेश को डीएम कोर्ट में चुनौती दी थी. करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद 14 अगस्त 2026 को डीएम ने तहसीलदार कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए मदरसा पक्ष की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद प्रशासन ने जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया. तय समय सीमा में कब्जा नहीं हटाए जाने पर प्रशासन ने मंगलवार को कार्रवाई शुरू कर दी.

सपा विधायक और कार्यकर्ताओं ने किया विरोध

मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई की जानकारी मिलते ही डुमरियागंज की सपा विधायक सैय्यदा खातून, सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव समेत 50 से ज्यादा कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए. सपा नेताओं ने कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच बहस भी हुई. कुछ देर के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और हल्की धक्का-मुक्की भी हुई. पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को कार्रवाई स्थल से दूर किया. करीब दो घंटे तक चली कार्रवाई के बाद प्रशासन ने मदरसे के अवैध निर्माण को हटा दिया.

मदरसे में पढ़ते थे करीब 400 बच्चे

अधिकारियों के मुताबिक इस मदरसे में करीब 400 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे. प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश के आधार पर की गई है और सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया गया है. वहीं, सपा नेताओं ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि वे इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे. उनका आरोप है कि प्रशासन मनमानी कार्रवाई कर रहा है. सिद्धार्थनगर की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर प्रदेश में अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है.