सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आखिरकार करीब 22 घंटे बाद कोतवाली पुलिस ने ओम साई हॉस्पिटल के संचालक डॉ. विनोद विश्वकर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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रात 1 बजे शिकायत लेकर पहुंचे डॉक्टर, दफ्तर में मचाया बवाल
जानकारी के मुताबिक 26 जुलाई की रात करीब एक बजे पचखोरा स्थित विद्युत सेवा केंद्र में बिजली संबंधी शिकायत लेकर पहुंचे डॉ. विनोद विश्वकर्मा का कनिष्ठ अभियंता जसप्रीत सिंह और कर्मचारी शेर बहादुर सिंह से विवाद हो गया। आरोप है कि डॉक्टर ने कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। पूरी घटना कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई और यही फुटेज लिखित शिकायत के साथ कोतवाली पुलिस को सौंपा गया।
इसके बावजूद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की। बिजली विभाग के कर्मचारी लगभग 22 घंटे तक कार्रवाई के लिए मशक्कत करते रहे। वे कई बार कोतवाली पहुंचे, घंटों थाने में बैठे रहे और वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क करते रहे लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ।
कर्मचारियों ने दी हड़ताल की चेतावनी, तब दर्ज हुआ केस
मामला तब और गंभीर हो गया जब बिजली कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आरोपित के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो वे काम बंद कर हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके बाद यह मामला मीडिया में प्रमुखता से सामने आया और देर शाम पुलिस ने डॉ. विनोद विश्वकर्मा के खिलाफ BNS की धारा 296(B), 331(4), 351(3) एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
‘कर्मचारी हड़ताल पर जाते तो ठप हो जाता शहर’
शहर संभाग के कार्यपालन अभियंता दिनकर दुबे ने बताया कि विभाग के कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज, धमकी और शासकीय कार्य में बाधा जैसी घटना बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने में देरी से कर्मचारियों में असंतोष पैदा हो रहा था। यदि कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते तो शहर की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में बारिश का मौसम चल रहा है, ऐसे में प्रतिदिन करीब 600 बिजली संबंधी शिकायतें प्राप्त होती हैं, जिनमें से लगभग 550 शिकायतों का निराकरण विभाग के कर्मचारी लगातार मेहनत करके करते हैं। बारिश के दौरान फॉल्ट और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में कर्मचारियों का मनोबल गिरना और हड़ताल की स्थिति बनना आम जनता के लिए भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता था।
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हालांकि मीडिया के दखल और कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी के बाद आखिरकार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया, लेकिन यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल छोड़ गया है। जब सरकारी विभाग के कर्मचारियों को, वह भी सीसीटीवी जैसे प्रत्यक्ष साक्ष्यों के बावजूद, एफआईआर दर्ज कराने के लिए करीब 22 घंटे तक संघर्ष करना पड़ा, तो ऐसे में आम नागरिक, ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय पाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता होगा। यही सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में है।
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