Dharm Desk- Skanda Shashti 2026 : अधिकमास में आने वाली स्कंद षष्ठी इस बार बेहद विशेष मानी जा रही है. सनातन परंपरा में षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय, जिन्हें मुरुगन देव भी कहा जाता है, को समर्पित होती है. इस दिन उनका व्रत एवं पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. लेकिन जब यही तिथि पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास में पड़े, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होता है, ऐसे में इस दौरान किए गए हर व्रत और पूजा का पुण्य फल कई गुना अधिक मिलता है.

इस वर्ष 21 मई को पड़ने वाली स्कंद षष्ठी न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे जीवन की बाधाओं, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाने वाला भी है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर संतान सुख, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. खासकर जिन लोगों को संतान संबंधी समस्याएं हैं या जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी होगा. ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए यह दिन भक्ति और साधना का विशेष अवसर लेकर आया है.
कब है स्कंद षष्ठी?
षष्ठी तिथि 21 मई सुबह 8:26 बजे शुरू होगी. तिथि का समापन 22 मई, सुबह 6:24 बजे होगा।उदया तिथि अनुसार व्रत 21 मई को रखा जाएगा.
क्यों है यह दिन खास?
अधिकमास में पड़ने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ता है. संतान की लंबी आयु और सुख की प्राप्ति के लिए व्रत करें. शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलने के लिए खास दिन है. इस दिन व्रत रखने से आत्मबल और साहस में वृद्धि होगी.
पूजन विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल पर भगवान कार्तिकेय, शिव और पार्वती की स्थापना करें. गंगाजल, दूध और दही से अभिषेक करें. कुमकुम, चंदन, अक्षत, लाल फूल और मिठाई अर्पित करें. ओम स्कंदाय नमः मंत्र का जाप करें. अंत में आरती कर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें.
व्रत में क्या न करें
पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करे. मांसाहार, लहसुन-प्याज से परहेज करे. क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें. किसी का अपमान या अनादर न करें.

