संजीव, सोनीपत. सोनीपत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। डीसी ऑफिस परिसर स्थित तहसीलदार कार्यालय की सेल्स ब्रांच में तैनात एक क्लर्क को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसकी डील 30 हजार में तय हुई।

सोनीपत में एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार कार्यालय की सेल्स ब्रांच में तैनात कस्टोडियन क्लर्क सचेत को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासनिक कार्यालय में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता विमल किशोर ने एसीबी को शिकायत दी थी कि क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर क्लर्क सचेत उनसे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। शिकायत की जांच के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच 30 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था।

जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय राशि आरोपी क्लर्क को सौंपी, पहले से मौके पर मौजूद एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। कार्रवाई तहसीलदार कार्यालय के पास स्थित कमरा नंबर 11 में की गई। टीम ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर साक्ष्य जुटाने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का काम शुरू किया।

कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम बरामद की गई और आरोपी से पूछताछ भी शुरू कर दी गई। एसीबी अधिकारियों ने हाथ धुलवाने सहित अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी कीं। आरोपी को अदालत में पेश कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शिकायतकर्ता विमल किशोर ने आरोप लगाया कि सोनीपत नगर निगम और तहसील कार्यालय में लंबे समय से भ्रष्टाचार व्याप्त है। उनका कहना है कि आम लोगों को जानबूझकर दफ्तरों के चक्कर कटवाए जाते हैं और बाद में काम कराने के लिए पैसों की मांग की जाती है।

विमल किशोर ने बताया कि उनका परिवार देश विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आकर सोनीपत में बस गया था। उस दौरान आवंटित संपत्ति और पुनर्वास से जुड़े कई दस्तावेज विभागों के पास मौजूद थे। अब जब संपत्ति से संबंधित कार्य और रजिस्ट्री कराने की जरूरत पड़ती है तो क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की मांग की जाती है, लेकिन पुराने रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार पुराने रिकॉर्ड की तलाश में रोहतक और पंजाब के लुधियाना तक संपर्क करना पड़ता है, फिर भी जरूरी दस्तावेज मिलने की गारंटी नहीं होती। ऐसे मामलों में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से अलॉटमेंट लेटर मांगा जाता है, जबकि कई पुराने मामलों में यह रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता। उनका कहना है कि पैसे खर्च करने वालों के काम जल्दी हो जाते हैं, जबकि आम नागरिकों को लंबे समय तक भटकना पड़ता है।

फिलहाल एसीबी ने आरोपी क्लर्क को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और शिकायत मिलने पर किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले में आगे की जांच के बाद आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड की मांग भी की जा सकती है।