रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बेंगलुरु के मुद्देनहल्ली में सत्य साईं ग्राम स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए। साय ने कहा कि मैं सद्गुरु श्री मधुसूदन साई का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मुझे सत्य साईं ग्राम के इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती समारोह में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया। यह मेरे लिए अत्यंत गर्व और सौभाग्य का विषय है कि मुझे इस संस्थान की पचास वर्षों की प्रेरणादायी यात्रा का साक्षी बनने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि सदगुरु श्री मधुसूदन साई का जन्म छत्तीसगढ़ की पावन धरती बिलासपुर में हुआ। हम सभी के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि हमारे राज्य की इस पवित्र भूमि ने ऐसे आध्यात्मिक महापुरुष को जन्म दिया, जिनका जीवन आज संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा बन चुका है। सदगुरु श्री मधुसूदन साई जी की यह अद्भुत यात्रा भी केवल अपने गुरु भगवान सत्य साई बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से आरंभ हुई। यही गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है।

सीएम साय ने कहा, यह प्रसन्नता का विषय है कि इस स्वर्ण जयंती समारोह की शुरुआत ‘मूल्य शिक्षा’ पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से हुई। आज के युग में, जब तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, तब चरित्र निर्माण और मूल्यों पर आधारित शिक्षा का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। भारत की शिक्षा परंपरा सदैव मूल्य-आधारित रही है। तक्षशिला, नालंदा और गुरुकुल परंपरा ने ज्ञान के साथ चरित्र, अनुशासन, सेवा और करुणा का संस्कार दिया। यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
साय ने कहा, आज का युग एआई, डिजिटल क्रांति और तीव्र तकनीकी परिवर्तन का युग है। तकनीक हमारे जीवन को सरल बना रही है, लेकिन यदि उसके साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्य नहीं होंगे, तो प्रगति अधूरी रह जाएगी। विकसित भारत का सपना मूल्य-आधारित शिक्षा के बिना पूरा नहीं हो सकता। हमें ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो तकनीक में दक्ष होने के साथ-साथ संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी हों। सत्य साईं संस्थान जैसे संस्थानों का योगदान इस दिशा में अत्यंत प्रेरणादायक है। इस संस्थान ने वर्षों से शिक्षा को सेवा, चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों से जोड़कर समाज के सामने उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा, सदगुरु श्री मधुसूदन साई जी ने कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विद्यालय स्थापित किए, जहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पूर्णतः निःशुल्क एवं मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान की जाती है। आज लगभग 4,000 विद्यार्थी, कक्षा 6 से लेकर पीएचडी तक, पूर्णतः निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन तथा समग्र व्यक्तित्व विकास प्राप्त कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के विकास, कौशल शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सत्य साईं ग्राम जैसी संस्थाओं से प्रेरणा लेकर हम अपने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ कर सकेंगे।

सीएम ने कहा, हमारी सरकार छत्तीसगढ़ में शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे संस्कार, सेवा, कौशल और चरित्र निर्माण से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। नई शिक्षा नीति भी इन्हीं उद्देश्यों पर बल देती है और सत्य साईं ग्राम इस सोच का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। मेरा विश्वास है कि इस सम्मेलन से निकले विचार शिक्षा को अधिक मानवीय, समावेशी और मूल्य-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। पचास वर्ष पहले दूरदर्शी शिक्षाविद् श्री मडियाला नारायण भट्ट जी ने सत्य साईं ग्राम रूपी जिस बीज को यहाँ बोया था, वह श्री सत्य साईं बाबा के आशीर्वाद से आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में पल्लवित हो गया है।
सीएम साय ने कहा, अपनी गौरवशाली यात्रा में यह संस्थान शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। ‘एक विश्व, एक परिवार’ का आदर्श भारत के शाश्वत दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का साकार स्वरूप है। सत्य साईं ग्राम ने इस भारतीय दर्शन को व्यवहार में उतारकर विश्व के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।सौ से अधिक देशों में मानवता की सेवा का कार्य भारत की सेवा परंपरा का विस्तार है। सत्य साईं ग्राम आज विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, निःशुल्क चिकित्सा संस्थानों, पोषण कार्यक्रमों और समाज सेवा की अनेक संस्थाओं का केंद्र बन चुका है।

उन्होंने कहा, सत्य साईं ग्राम ने भारत के पहले निःशुल्क निजी ग्रामीण मेडिकल कॉलेज की स्थापना की और विश्व के सबसे बड़े निःशुल्क बाल हृदय चिकित्सालय नेटवर्क में से एक का निर्माण किया। हजारों निर्धन बच्चों को नया जीवन देना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गर्व का विषय है कि श्री सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल, रायपुर भी इसी सेवा परंपरा का सशक्त केंद्र है। यहां जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क एवं विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस संस्थान ने हजारों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और मुस्कान लौटाई है।
सीएम ने कहा, मुझे गर्व है कि इस दिव्य यात्रा का पहला अध्याय मेरे अपने राज्य छत्तीसगढ़ में लिखा गया। वर्ष 2011 में रायपुर में प्रथम संजीवनी बाल्य हृदय चिकित्सालय का भूमिपूजन हुआ तथा 2012 में देश के प्रथम पूर्णतया निःशुल्क श्री सत्य साईं संजीवनी बाल्य हृदय चिकित्सालय का शुभारंभ हुआ। मुझे स्वयं इस सेवा का प्रत्यक्ष अनुभव नवंबर 2025 में रायपुर अस्पताल में आयोजित “दिल की बात” कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में उन बच्चों और उनके परिवारों से मिलने का अवसर मिला, जिनका जीवन इस सेवा ने बदल दिया। आज तक 40,000 से अधिक निःशुल्क जीवनरक्षक हृदय शल्यक्रियाएँ की जा चुकी हैं।
साय ने कहा, श्री सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल, रायपुर सेवा, करुणा और मानवता का जीवंत केंद्र है। जब चिकित्सा सेवा का माध्यम बनती है, तब वह केवल उपचार ही नहीं करती, बल्कि पूरे समाज में नया विश्वास भी जगाती है। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के हमारे प्रयासों में भी ऐसे सेवा मॉडल निरंतर प्रेरणा देते हैं। इस समारोह के दौरान स्वर्ण जयंती महिला छात्रावास का शिलान्यास बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।मैं यहां उपस्थित सभी शिक्षकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों और इस मिशन से जुड़े प्रत्येक कार्यकर्ता को साधुवाद देता हूँ। किसी भी महान संस्थान की सबसे बड़ी पूँजी उसके सेवाभावी लोग होते हैं।

उन्होंने कहा, आज जब पूरा विश्व शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की तलाश में है, तब सत्य साईं ग्राम जैसे संस्थान बिना किसी भेदभाव के शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और समाज सेवा के माध्यम से विश्व बंधुत्व का संदेश दे रहे हैं। यह विकसित भारत की उस भावना को भी सशक्त करता है, जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने की है। छत्तीसगढ़ सेवा, अध्यात्म और लोककल्याण की समृद्ध परंपरा की भूमि है। भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि होने के कारण हमारी संस्कृति में सेवा और करुणा के संस्कार रचे-बसे हैं। इसलिए सत्य साईं ग्राम के विचार और छत्तीसगढ़ की संस्कृति एक-दूसरे के अत्यंत निकट हैं।

सीएम ने कहा, मेरी कामना है कि आने वाले समय में भी यह संस्थान सेवा, करुणा, शिक्षा और मानवीय मूल्यों के प्रकाश से आलोकित होता रहे और पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का केंद्र बना रहे। आज सदगुरु श्री मधुसूदन साई जी के 47वें जन्मदिवस के इस पावन अवसर पर मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मानव सेवा की निरंतर शक्ति प्रदान करें।मैं इस भव्य आयोजन के सभी आयोजकों का भी हृदय से धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने मुझे इस ऐतिहासिक अवसर का सहभागी बनने का सौभाग्य प्रदान किया।
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