“भूमि बन पंथ तुम्हारा, जहां तुम्हार पदारथ सारा।” श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड की इस पंक्ति को आधार बनाकर आज मध्यप्रदहेश के मोहन राज की प्रशंसा की जा सकती है, जैसा कि इस चौपाई का आशय है “वह भूमि धन्य है जहां से जनकल्याण का मार्ग निकलता है।” मध्यप्रदेश की प्रशासनिक और राजनीति दृष्टि में हाल ही में मोहन सरकार के द्वारा लिया गया निर्णय एक व्यापक परिवर्तन की सुगबगाहट है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि राज्य सरकार का केंद्र बिंदु केवल विकास नहीं बल्कि न्यायसंगत और समावेशी विकास है।
किसानों के लिए ऐतिहासिक और असाधारण निर्णय रहा, ‘चार गुना मुआवजा’
ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि के भू-अर्जन पर बाजार दर से चार गुना मुआवजा देने का निर्णय, ‘कृषि वर्ष’ में किसानों के लिए सबसे बड़ा और सार्थक कदम रहा। चार गुना मुआवजा का दिया जाना प्रथम दृष्टया सिर्फ एक आर्थिक प्रावधान लगता है मगर सूक्ष्मता में जाएँ तो यह किसान सम्मान की पुनर्स्थापना है। इससे पहले भूमि अधिग्रहण किसानों के लिए चिंता और असुरक्षा का विषय हुआ करता था मगर अब यह एक आर्थिक अवसर बनने जा रहा है। इस निर्णय से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि यह विकास परियोजनाओं के प्रति किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगा। मध्यप्रदेश राज्य सरकार यह कदम उस विचारधारा को मजबूत करने वाला है जिसमें माना जाता है कि “विकास की कीमत किसान को नहीं चुकानी चाहिए बल्कि उसे उसका उचित और सम्मानजनक हिस्सा मिलना चाहिए।”

अधोसंरचना में बड़ा निवेश करेगा विकास की रीढ़ मजबूत
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 33,985 करोड़ रुपये की स्वीकृति सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे मद के लिए दी गई है। होने वाला यह निवेश मोहन सरकार के दीर्घकालिक दृष्टि और दूरंदेशी का परिचायक है। 25,164 करोड़ रुपये का निवेश लोक निर्माण कार्यों के लिए जिनमे शामिल हैं ग्रामीण और जिला में सड़कों का उन्नयन और पुलों और भवनों का निर्माण। राज्य सरकार का यह प्रयास ग्राम्य और शहरी जीवन के अंतर को कम करने वाला है क्योंकि सड़कें केवल यातायात का ऐसा माध्यम होती हैं जिसे आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा भी कहा जा सकता है।

खेतों तक पानी, किसानों तक समृद्धि पहुँचाएँगी, सिंचाई परियोजनाएं
157 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज के साथ इन्दौख-रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और 969 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज के साथ छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार परियोजनाओं के सामाजिक प्रभावों को भी भली-भाँति समझती है। 1.90 लाख हेक्टेयर प्रक्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ने से 628 गांवों सीधे तौर पर लाभान्वित होने जा रहे है, परिणामस्वरूप राज्य की कुल कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई जान आ जाएगी।
विद्यार्थी और युवाओं को सौगात देकर मजबूत की जा रही भविष्य की नींव
निःशुल्क साइकिल योजना और शैक्षणिक संस्थानों के अपग्रेड़ेशन के लिए 2,190 करोड़ रुपये की स्वीकृति मध्यप्रदेश राज्य सरकार का एक दूरदर्शी कदम है। मोहन सरकार के इस पहल से ग्रामीण छात्रों की शैक्षणिक संस्थान तक पहुंच आसान होगी,शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों का सुदृढ़ीकरण होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी होगा इस योजना को ‘समान अवसर’ का व्यापक विस्तार भी कहा जा सकता है।“मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम” के लिए स्वीकृत बड़ी राशि यह दर्शाती है कि सरकार युवाओं को Policy Making and Implementation में शामिल करना चाहती है।
इस पहल से प्रशासन और अधिक ऊर्जावान, Innovative and Result-Oriented बन पाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में लाई जा रही क्रांति
प्रदेश में “Advanced Medical Services” या “Advanced Healthcare Services” के लिए मध्यप्रदेश सरकार का 5,479 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वास्थ्य क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाने वाला है। सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का विस्तार ,मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन , मण्डला में नया मेडिकल कॉलेज साथ ही, अस्पतालों में परिजन आवास की व्यवस्था एक संवेदनशील पहल है, जो मरीजों के साथ आए परिवारों की समस्याओं को समझती है।

दुग्ध उत्पादन को सशक्त कर के बढ़ाई जा रही किसानों की आय
डॉ. मोहन यादव सरकार ने मध्यप्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने का लक्ष्य रखा है इसके लिए 1752 नई दुग्ध समितियों की स्थापना की जा रही है जिससे प्रतिदिन 10 लाख किलोग्राम से अधिक दूध का संकलन होगा और किसानों को 1600 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। राज्य सरकार की यह कोशिश उसकी स्वच्छ मंशा का प्रदर्शन भी है कि सरकार कृषि के साथ सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है जिससे किसानों की आय के नए स्रोत बनें।
उर्वरक और तकनीक से आधुनिक खेती की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
यूरिया और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और उसके वितरण प्रणाली में अभूतपूर्व सुधार लाया जा रहा है। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार तकनीक आधारित कृषि व्यवस्था को जमकर बढ़ावा दे रही है। जिसका सु-परिणाम यह होगा की अब किसानों को लाइन में लगे बिना यूरिया और अन्य उर्वरक उपलब्ध होगा, यह बदलाव देखने में छोटा दिखाई पड़ सकता है, मगर इसका प्रभाव बहुत व्यापक होने वाला है।
विकास और संवेदनशीलता का अद्वितीय संतुलन
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के सभी निर्णयों को यदि समग्र रूप से देखा जाए तो एक बात तो स्पष्ट होती है कि मध्यप्रदेश राज्य सरकार ने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जिसके केंद्र में किसान हैं, समावेशी विकास है, दीर्घकालिक योजनाएं हैं और संवेदनशीलता के साथ व्यवहारिकता का संतुलन है। मध्यप्रदेश मॉडल योजनाओं का संग्रह भी है और नीतिगत दर्शन भी।रामचरितमानस की चौपाइयों से लेकर आधुनिक प्रशासनिक निर्णयों तक एक बात ही प्रमुख है कि जनहित ही सर्वोपरि है। डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों से एक बात का पता मिलता है कि मध्यप्रदेश राज्य सरकार अपनी घोषणाओं के ठोस और प्रभावी क्रियान्वयन पर विश्वास करती है। किसानों को चार गुना मुआवजा, अधोसंरचना में भारी निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार, हाल-फ़िलहाल के ये सभी कदम एक ऐसे राज्य की तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं जो सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ / लल्लूराम डॉट कॉम.
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