ODISHA DESK, भवानीपटना: वन्यजीव संरक्षण और विशेष रूप से हाथियों की सुरक्षा की दिशा में ओडिशा सरकार को एक और बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को कालाहांडी जिले के कुत्रुखारी में एक विशेष हाथी सेवा एवं पुनर्वास केंद्र (Elephant Care and Rehabilitation Centre) का औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह केंद्र संकट में फंसे, घायल या बीमार जंगली हाथियों की सुरक्षा, उपचार और उनकी देखरेख के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जरिया बनेगा।

लगभग 7 एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में फैले इस नवनिर्मित केंद्र को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह हाथियों के लिए एक ‘आइसोलेशन कैंप’ के रूप में काम कर सके। यहाँ हाथियों का उचित इलाज किया जाएगा और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें वापस उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

वन्यजीव संरक्षण में एक “मील का पत्थर”

ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने इस केंद्र का उद्घाटन करते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक “मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा “जंगलों के सिकुड़ने और बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष (Man-Elephant Conflict) के कारण हाथियों की आबादी पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। ऐसे समय में इस तरह के एक विशेष केंद्र की सख्त जरूरत थी। यह केंद्र हाथियों के रेस्क्यू (उद्धार) और पुनर्वास के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगा।”

केंद्र में उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं

स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पुनर्वास केंद्र को हाथियों की प्राकृतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यहाँ निम्नलिखित प्रमुख सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं:

सुरक्षित एनक्लोजर: हाथियों के घूमने-फिरने के लिए पानी और पेड़-पौधों से घिरा एक सुरक्षित दायरा।

विशेष चिकित्सा व्यवस्था: घायल या बीमार हाथियों को अलग रखकर उनका इलाज करने के लिए एक आधुनिक पशु चिकित्सा कक्ष (Veterinary Room)।

हाथी शावकों के लिए शेड: अनाथ या घायल हाथी के बच्चों की विशेष देखभाल के लिए अलग से शेड बनाए गए हैं।

महावतों के लिए आवास: हाथियों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए महावतों के रहने का स्थान, एक रसोई घर और भोजन भंडारण गृह (Food Storage Room)।

इंसानी दखल रहेगा सीमित

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यहाँ इंसानों की मौजूदगी को बेहद सीमित रखा जाएगा, ताकि रेस्क्यू किए गए हाथी इंसानी आदतों के आदी न हों और ठीक होने के बाद जंगल में आसानी से घुल-मिल सकें। इसके साथ ही, इस केंद्र को भविष्य में वन्यजीव अनुसंधान (Wildlife Research) और संरक्षण प्रशिक्षण (Conservation Training) के एक प्रमुख हब के रूप में भी विकसित किया जाएगा।

ओडिशा का चौथा हाथी पुनर्वास केंद्र

आपको बता दें कि ओडिशा में हाथियों के संरक्षण के लिए पहले से ही तीन पुनर्वास केंद्र काम कर रहे हैं, जो चंदका (खोरधा), कपिलास (ढेंकनाल) और सिमिलिपाल (मयूरभंज) में स्थित हैं। अब कालाहांडी का कुत्रुखारी इस सूची में जुड़ने वाला राज्य का चौथा आधिकारिक हाथी पुनर्वास केंद्र बन गया है। इस केंद्र के शुरू होने से दक्षिण ओडिशा के जंगलों में रहने वाले हाथियों को समय पर चिकित्सा और सुरक्षा मिल सकेगी।

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