Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा के सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में बड़े पैमाने पर सामने आई गंभीर त्रुटियों ने राज्य के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। महज 50 पाठ्यपुस्तकों में 2,125 गंभीर गलतियां पाए जाने के बाद अब इस पूरे मामले की गहन जांच शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय जांच समिति लगातार बैठकें कर रही है और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में जुट गई है।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए विकास आयुक्त के नेतृत्व वाली उच्च स्तरीय समिति पिछले तीन दिनों से विभिन्न स्तर के शिक्षा अधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें और चर्चा कर रही है। अब तक लगभग 10 वरिष्ठ अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच कमेटी इस बात का पता लगा रही है कि पाठ्यपुस्तकों के लेखन, संकलन, प्रूफरीडिंग से लेकर अंतिम प्रिंटिंग (मुद्रण) तक, किस स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई और गुणवत्ता जांच (क्वालिटी चेक) की व्यवस्था पूरी तरह कैसे विफल रही।

प्रारंभिक जांच और शिक्षकों द्वारा दी गई समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के लिए तैयार की गई इन किताबों में कई तरह की चौंकाने वाली गलतियां मिली हैं, जिनमें-

तथ्यात्मक गलतियां: महान वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन को वैज्ञानिक के बजाय “महानतम पायलट” लिख दिया गया है।
तस्वीरों की बड़ी भूल: ओडिशा विधानसभा के स्थान पर कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर छाप दी गई है, और हम्पी के ऐतिहासिक परिसर को कोणार्क सूर्य मंदिर बताया गया है।

भौगोलिक कमियां: ओडिशा की प्रसिद्ध नियमगिरि पर्वत श्रृंखला को झारखंड में स्थित बता दिया गया है। इसके अलावा किताबों में अनगिनत भाषाई, व्याकरण संबंधी और वर्तनी (स्पेलिंग) की गलतियां भी पाई गई हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद राज्य के शैक्षणिक हलकों, अभिभावक संघों और विपक्षी दलों ने सरकार तथा शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और ओड़िआ अस्मिता पर ठेस बताया है। शिक्षा विभाग के दावों पर सवाल उठाते हुए लोगों का कहना है कि आखिर इतनी परतों की समीक्षा और आधिकारिक मंजूरी के बाद भी ये गलतियां पकड़ में क्यों नहीं आईं?

फिलहाल, जांच कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है। इस उच्च स्तरीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद सरकार दोषी अधिकारियों और प्रिंटिंग एजेंसियों के खिलाफ क्या सख्त दंडात्मक कदम उठाती है, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।

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