संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर दूसरे दिन भी चर्चा लगातार जारी है. एनडीए सरकार जहां इसे देश हित में बात रही है वहीं कॉंग्रेस समेत विपक्षी दल इसे 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी बताते हुए इसका विरोध कर रही है. विपक्ष का कहना है कि इस बिल से साउथ में लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी जजीसक बीजेपी को सीधा फायदा 2029 के आम चुनाव में होगा. इसी कड़ी में परिसीमन की कोशिश का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण करने में नाकाम रहे उन्हें राजनीतिक इनाम दिया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर थोड़ा इंतजार किया जाना चाहिए.

जल्दबाजी दिखा रही सरकार

लोकसभा में चल विशेष सत्र के दूसरे दिन चर्चा में शामिल होते हुए कांग्रेस नेता थरूर ने कहा, “सरकार ने नोटबंदी के दौरान जिस तरह की जल्दबाजी दिखाई थी, वैसी ही जल्दबाजी परिसीमन की प्रक्रिया में भी दिखाई जा रही है, और यह एक तरह का ‘राजनीतिक विमुद्रीकरण’ है. परिसीमन के मुद्दे की वजह से महिलाओं के आरक्षण को बंधक बना लिया गया है. महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.”

परिसीमन बिल को लेकर थोड़ा इंतजार करेंः थरूर

शशि थरूर ने अमित शाह के फॉर्मूले को लेकर कहा, “अमित शाह द्वारा सुझाया गया 50 फीसदी का फ़ॉर्मूला एक जोखिम भरा राजनीतिक बयान है. यह विधायिका द्वारा किया गया कोई वादा नहीं है.” इसे साथ ही थरूर ने लोकसभा की सीट 850 तक किए जाने की आलोचना करते हुए कहा, “लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने से यह एक ऐसी संस्था बन जाएगी जो ठीक से काम नहीं कर पाएगी. लोकसभा का आकार तो बढ़ाया जा रहा है, लेकिन राज्यसभा का आकार बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. इससे दोनों सदनों के बीच असंतुलन पैदा हो जाएगा.” उन्होंने यह भी कहा कि हम महिला आरक्षण बिल का समर्थन करेंगे, लेकिन परिसीमन बिल के मामले में हमें थोड़ा इंतजार करना चाहिए.

परिसीमन को लेकर 3 बातों पर ध्यान देने की बात बोली

परिसीमन से होने वाले नुकसान और इसके लिए 3 चीजों पर गौर करने की बात करते हुए थरूर ने आगे कहा, “हमें इस बारे में साफ-साफ बात करनी चाहिए कि परिसीमन के क्या नतीजे हो सकते हैं. परिसीमन के लिए गहन विचार-विमर्श की जरूरत होती है. लेकिन इसमें 3 अहम टकराव के बिंदु हैं, पहला, छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन. दूसरा, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों के बीच संतुलन, जिन्होंने अपने यहां जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीति लागू किए; जबकि उत्तरी राज्यों के बीच संतुलन, जिन्होंने ऐसा नहीं किया है.

परिसीमन में, जो राज्य जनसंख्या पर नियंत्रण पाने में नाकाम हो गए हैं, उन्हें अब ज्यादा राजनीतिक ताकत देकर पुरस्कृत किया जाएगा. हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हम यही संदेश देना चाहते हैं. तीसरा, उन राज्यों के बीच संतुलन जो हमारी अर्थव्यवस्था के इंजन रहे हैं, और उन राज्यों के बीच जो केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड के मुख्य प्राप्तकर्ता हैं.”

दूसरी ओर, बहस में शामिल होते हुए DMK की सांसद कनिमोझी ने गुरुवार रात 10 बजे महिला आरक्षण बिल को नोटिफाई करने के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए. कनिमोझी ने कहा कि सरकार ने इस बिल पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया. सदन में हम सभी सांसद लगातार चर्चा कर रहे हैं और सरकार ने इस बिल को नोटिफाई कर दिया. इससे यही समझ आता है कि सत्ता में मौजूद लोगों के अंदर सदन के प्रति कोई सम्मान नहीं है.

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