अजय सैनी, भिवानी। चांग गांव में स्थित आइडियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को मानसिक दबाव से बचाने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के मुख्य वक्ता अभिषेक कुमार सिंह और ज्ञानप्रकाश सिंह ने हिस्सा लिया। उन्होंने वहां मौजूद शिक्षकों और स्टाफ को बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव को पहचानने और उसे दूर करने के कई महत्वपूर्ण तरीके सिखाए। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के सामने दीप जलाकर और वंदना के साथ हुई। इस मौके पर स्कूल के निदेशक अशोक मुंजाल, प्रबंधक समिति के सदस्य सोमप्रकाश, सुनील रहेजा, हरीश रहेजा और पूरा स्टाफ मौजूद रहा।

पढ़ाई के बढ़ते दबाव से किशोरों में बढ़ रहा है तनाव

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता अभिषेक कुमार ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में पढ़ाई और आगे निकलने की होड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई है। यही वजह है कि किशोरावस्था में बच्चों के लिए मानसिक दबाव और तनाव बहुत आम बात हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ पढ़ाना ही नहीं है, बल्कि उसे समय रहते अपने छात्रों के इस मानसिक बदलाव और तनाव को समझना चाहिए। शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए और बातचीत के जरिए उनकी इस परेशानी को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

तनाव से निपटने के लिए कराई गईं विशेष गतिविधियां

दूसरे वक्ता ज्ञानप्रकाश ने कार्यशाला में मौजूद स्टाफ को रोजमर्रा की जिंदगी में तनाव से निपटने की बेहद आसान और व्यावहारिक तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि दैनिक जीवन में कुछ छोटे और सरल बदलाव करके मानसिक दबाव को कैसे कम किया जा सकता है। कार्यशाला को और बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों से कुछ खास गतिविधियां भी कराई गईं, जिनमें ग्रुप डिस्कशन, रोल-प्ले और मुश्किलों को मिलकर सुलझाने वाले कई मजेदार अभ्यास शामिल थे।

विजेताओं और अतिथियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के आखिरी हिस्से में आइडियल स्कूल के निदेशक अशोक मुंजाल ने दोनों मुख्य वक्ताओं का स्कूल पहुंचने और स्टाफ का मार्गदर्शन करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने दोनों विशेषज्ञों को स्कूल की तरफ से यादगारी के तौर पर एक-एक स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से शिक्षकों को बच्चों की मानसिक स्थिति को करीब से समझने में मदद मिलेगी, जिससे स्कूल का माहौल बच्चों के लिए और अधिक बेहतर और खुशहाल बन सकेगा।