राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेशमें बिजली खरीद समझौतों यानी MOU को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। अब मध्यप्रदेश में किसी भी लॉन्ग टर्म या मध्यकालीन बिजली खरीद और बिजली सप्लाई से जुड़े एमओयू कैबिनेट की पूर्व मंजूरी के बिना लागू नहीं किए जाएंगे।
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यह फैसला मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की बोर्ड बैठक में लिया गया। प्रदेश में फिलहाल करीब 1,795 छोटे-बड़े, लघु और दीर्घ अवधि के बिजली खरीद समझौते लागू हैं, जिनके जरिए लगभग 26,012 मेगावॉट बिजली सप्लाई की जा रही है। ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि नई प्रक्रिया के तहत पहले मुख्य बोर्ड का प्रस्ताव ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को भेजा जाएगा। इसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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कैबिनेट की अनुमति मिलने के बाद ही संबंधित नीति और एमओयू लागू किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को बिजली खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

