विक्की आर्य, शमशाबाद। हर गांव का बच्चा पढ़े, आगे बढ़े… इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश सरकार ने सांदीपनि विद्यालय योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य दूर-दराज गांवों के मेधावी बच्चों को बेहतर शिक्षा देना और उन्हें स्कूल तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित परिवहन भी उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन विदिशा में इस महत्वाकांक्षी योजना की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां स्कूल बसों की कमी के चलते बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
ये तस्वीरें शमशाबाद विधानसभा के नटेरन स्थित सांदीपनि विद्यालय की हैं। सुबह-सुबह दूरस्थ गांवों से आने वाले बच्चे ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर स्कूल पहुंचते दिखाई देते हैं। जिन बच्चों के लिए कभी सरकारी स्कूल वाहन चलते थे, अब वे गांव तक नहीं पहुंच रहे। मजबूरी में अभिभावकों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लिया है।
सरकार ने सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि ग्रामीण क्षेत्र का कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। लेकिन वाहनों की संख्या कम होने से अब वही बच्चे रोज जोखिम उठाकर स्कूल पहुंच रहे हैं। बच्चों का कहना है कि पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे, चाहे ट्रॉली से जाना पड़े या किसी और संघर्ष का सामना करना पड़े।
“बस नहीं चल रही है, इसलिए मजबूरी में बच्चों को ट्रॉली से भेजना पड़ रहा है”
अभिभावकों का कहना है कि जब सरकारी बसें बंद हो गई हैं तो उनके पास बच्चों को ट्रॉली से भेजने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। उनका कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने देना चाहते, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता भी लगातार बनी हुई है।
यह पहली बार नहीं है जब विदिशा की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आई हो। हाल ही में पलोंह गांव का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें स्कूली बच्चे नदी पार कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए स्कूल पहुंच रहे थे। अब ट्रैक्टर-ट्रॉली में सफर करती ये तस्वीरें एक बार फिर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और परिवहन सुविधाओं पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।
उधर, शिक्षा विभाग का कहना है कि सांदीपनि विद्यालयों के लिए उपलब्ध वाहनों की संख्या कम है। विभाग का दावा है कि संसाधनों के अनुसार व्यवस्था संचालित की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
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