लक्ष्य वर्मा ,करनाल। जहां कई लोग छोटी-छोटी परेशानियों के सामने हार मान लेते हैं, वहीं करनाल की 17 वर्षीय दृष्टिबाधित छात्रा वंशिका ने अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता की नई मिसाल पेश की है। सीमित परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने CBSE 12वीं परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे करनाल का नाम रोशन किया है।
इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड में पढ़ाई कर रही वंशिका इससे पहले 10वीं कक्षा में भी 96 प्रतिशत अंक हासिल कर संस्थान में टॉप कर चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
मेरी पहचान मेरा हौसला है
वंशिका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि साल 2015 में उनका दाखिला चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित संस्थान में हुआ था और तभी से वह वहीं रहकर पढ़ाई कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

युवाओं को दिया खास संदेश
वंशिका ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने कहा, “अपने सपनों पर भरोसा रखिए और पूरी लगन से मेहनत कीजिए, मंजिल जरूर मिलेगी।”
UPSC पास कर IAS बनना है सपना
वंशिका को इतिहास और राजनीति विज्ञान विषय बेहद पसंद हैं। इसके अलावा हिंदी, इंग्लिश और म्यूजिक में भी उनकी खास रुचि है। अब उनका अगला लक्ष्य UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनना है, ताकि वह देश और समाज के लिए काम कर सकें।
आज करनाल की यह बेटी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि असली ताकत इंसान के इरादों और हौसलों में होती है, न कि परिस्थितियों में।

