नालंदा। जिले के हिलसा अनुमंडल कार्यालय में तैनात निम्नवर्गीय लिपिक (लोअर डिवीजन क्लर्क) और रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। बिहार सरकार की महत्वकांक्षी ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के गंभीर आरोप में उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी द्वारा इस निलंबन का आदेश जारी किए जाने के बाद से ही पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फर्जीवाड़े के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
फर्जी दस्तावेजों और भ्रामक तथ्यों के सहारे पाई थी नौकरी
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, पटना की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी और जांच रिपोर्ट के अनुसार, सुधांशु रंजन ने विभाग की आंखों में धूल झोंककर ‘बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति नियमावली, 2025’ का गलत तरीके से लाभ उठाया था। खेल प्राधिकरण की जांच में यह साफ तौर पर सामने आया कि आरोपी लिपिक ने अपनी नियुक्ति के लिए जिन कागजातों और तथ्यों का इस्तेमाल किया था, वे पूरी तरह से फर्जी थे। यह कृत्य सीधे तौर पर सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों का घोर उल्लंघन है। इस बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद, प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
हथियार और शराब तस्करी के मामलों में दर्ज है प्राथमिकी
आरोपी लिपिक सुधांशु रंजन का विवादों से गहरा नाता रहा है और उनकी मुश्किलें केवल फर्जी नौकरी हासिल करने तक ही सीमित नहीं हैं। उनके खिलाफ पटना के अलग-अलग थानों में कई गंभीर आपराधिक मामले भी पहले से दर्ज हैं। कंकड़बाग थाने में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज है। इसके अलावा, अवैध रूप से आग्नेयास्त्र (फायर आर्म्स) रखने और शराब वितरण जैसे बेहद संगीन आरोप में अगमकुआं थाने में भी उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें वे प्राथमिक अभियुक्त हैं। एक सरकारी कर्मचारी के रूप में उनके इन कृत्यों को ‘बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976’ का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।
निलंबन अवधि में स्थापना शाखा रहेगा मुख्यालय
इन तमाम गंभीर आरोपों के आधार पर, नालंदा के जिलाधिकारी ने ‘बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005’ के प्रावधानों के तहत सुधांशु रंजन को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आदेश के मुताबिक, निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला स्थापना शाखा, नालंदा निर्धारित किया गया है। हालांकि, नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और आरोप पत्र की तैयारी
प्रशासन ने इस पूरे मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने हिलसा के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को निर्देश दिए हैं कि वे आरोपी लिपिक को अविलंब निलंबन आदेश की तामिला सुनिश्चित कराएं और इसकी रिपोर्ट सौंपें। साथ ही, अनुशासनात्मक कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए साक्ष्यों के साथ आरोप पत्र (चार्जशीट) की तीन प्रतियां तुरंत उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। इस निलंबन की सूचना महानिदेशक (बिहार राज्य खेल प्राधिकरण) और अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग) को भी आधिकारिक रूप से भेज दी गई है।

