Supreme Court Hearing On CJP Protest Violence: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी छात्र आंदोलन हिंसा पर र सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। प्रदर्शनों से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही छात्रों पर हिंसा को लेकर केंद्र और 7 राज्यों को नोटिस जारी करते हुए निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठन करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही नीट परीक्षा का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन, गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारियों, वकीलों और मीडिया कर्मियों पर हमलों जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘शुरू में आंदोलन शांति से चल रहा था तो फिर एक दिन हिंसा हो गई। इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला कि पुलिस ने ज्यादा सख्ती कर दी और दूसरा कि प्रदर्शनकारियों में ऐसे लोग घुस आए जो हिंसा भड़काना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जब एक बार प्रोटोकॉल बन जाएगा, तब जवाबदेही तय करना आसान हो जाएगा।
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या-क्या कहा
याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पुलिस चाहे तो उग्र लोगों पर एफआईआर कर सकती है, लेकिन जहां तक संभव हो बल प्रयोग से बचना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान ऐसे पुलिसकर्मी भी थे, जो कि यूनिफॉर्म में नहीं थे और हथियार लेकर चल रहे थे। उन्होंने बलप्रयोग भी किया। याचिकाकर्ता ने मांग करते हुए कहा कि पूर्व चीफ जस्टिस की निगरानी में SIT बननी चाहिए। कोर्ट भविष्य के उपाय की बात कर रहा है। हम उसका स्वागत करते हैं। प्रदर्शनकारियों की डिजिटल टेक्नोलॉजी से पहचान कर उसे सार्वजनिक करने पर भी रोक लगनी चाहिए। इसमें छात्र और कई नाबालिग हैं। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन था, जिसमें कुछ मांगें उठाई गई थीं और यह संविधान के दायरे में था। सूर्यकांत ने कहा कि सभी याचिकाओं में कुछ समान आरोप देखने को मिले हैं। इनमें एक 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी पैलेट गन के इस्तेमाल से जाने का मामला है। इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल की शिकायत भी है। एक युवती को गंभीर चोट लगने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया. वकीलों पर हमले की भी घटना सामने आई है। इसके अलावा सिविल ड्रेस यानी बिना वर्दी के पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
पीएम मोदी ने मेलोनी को Melody Toffee गिफ्ट दी, खुशी से झूम उठी इटली की प्रधानमंत्री
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


