कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। सुप्रीम कोर्ट ने चंबल में अवैध रेत खनन पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कार्रवाई को लेकर 3 राज्यों की सरकार को फटकारा है। SC ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से सवाल किया है कि क्या प्रशासन रेत माफिया के आगे कमजोर है ?
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन पर अब सीधे जब्ती और आपराधिक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। बिना नंबर वाले वाहनों से खनन परिवहन पर सख्ती से रोकने का आदेश दिया है। साथ ही NH-44 पुल के नीचे अवैध खनन पर भी SC ने चिंता जाहिर की है।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संगठित अवैध खनन नेटवर्क सक्रिय है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अवैध खनन नहीं बल्कि “organized illegal mining network” है। बिना नंबर प्लेट वाले वाहन खनन में इस्तेमाल होते हैं। SC ने कहा- ‘ऐसे वाहन कानून से बचने के लिए जानबूझकर चलाए जा रहे हैं। सिर्फ चालान नहीं, अब जब्ती और मुकदमा हो। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि तुरंत सीज करो,जब्ती करो, मालिक, फाइनेंसर और नेटवर्क पर केस करो।
उच्चतम न्यायालय ने NH-44 पुल की सुरक्षा पर भी खतरा जाहिर किया। मुरैना-धौलपुर बॉर्डर के पुल के नीचे खनन पर कोर्ट गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘प्रशासन सिर्फ कोर्ट की डांट के बाद जागा। कई कदम सिर्फ कोर्ट के दबाव के बाद उठाए गए।’
कोर्ट के ये मुख्य सख्त निर्देश
6 महीने में CCTV और सर्विलांस सिस्टम लगाने का आदेश
1 साल में Forest Guards की भर्ती पूरी करने का आदेश
NHAI को हाई-रिजॉल्यूशन नाइट विजन कैमरे लगाने का आदेश
लाइव CCTV फीड पुलिस और वन विभाग को देने का आदेश
चंबल नदी में कचरा फेंकने पर भी SC सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने यह की विशेष टिप्पणी
कोर्ट ने कहा-“सिर्फ जुर्माना लेकर छोड़ना कानून का मजाक है, क्या प्रशासन रेत माफिया के आगे कमजोर है?
कोर्ट ने कहा- “Institutional paralysis और administrative apathy दिखी”,“गड़ियाल, डॉल्फिन और चंबल का अस्तित्व खतरे में है।” कोर्ट ने ecological destruction और wildlife threat पर चिंता जताई।

