वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेजों में आधार के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उस याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, निवास स्थान और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है. याचिका में मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान की पुष्टि के लिए ही सीमित किया जाए.इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.
याचिका में केंद्र,राज्यों और चुनाव आयोग से निर्देश देने की मांग की गई है कि वे यह पक्का करने के लिए उचित कदम उठाएं कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के सबूत के तौर पर ही हो.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र और राज्यों सरकारों से जवाब मांगा है. याचिका के अनुसार आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.

वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना ने इस मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
याचिका में मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान की पुष्टि के लिए ही सीमित किया जाए. इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों और भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आधार का इस्तेमाल केवल पहचान के सबूत के तौर पर हो न कि नागरिकता, निवास, पते या जन्मतिथि के सबूत के तौर पर.

याचिका के अनुसार, नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6) में आधार को जन्मतिथि और पते के सबूत के तौर पर लिया जा रहा है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह प्रक्रिया कानून के खिलाफ है. याचिका में कहा गया है, “आधार एक्ट, 2016 की धारा 9 साफ तौर पर कहती है कि ‘आधार नागरिकता या निवास का सबूत नहीं है.’
PIL में खास तौर पर नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6) के लिए आवेदन फॉर्म में जन्मतिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है.
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