कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर जिला कोर्ट में बुधवार को देश के सबसे चर्चित राजघरानों में शामिल सिंधिया राजपरिवार के करीब 40 हजार करोड़ के पैतृक संपत्ति विवाद पर सुनवाई हुई। उम्मीद थी कि दशकों पुराना विवाद आज आपसी समझौते के साथ समाप्त हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, समझौते के कुछ बिंदुओं पर एक पक्ष ने आपत्ति जता दी, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को और समय दे दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई या आगमी कोर्ट की ओर से तय अगली तारीख पर होगी।
दरअसल, सिंधिया राजपरिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद की शुरुआत साल 1988-89 में हुई थी। बाद में वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद यह विवाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच जारी रहा। सालों तक मामला जिला न्यायालय और फिर हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा। आज जिला न्यायालय में दोनों पक्षों के समझौते संबंधी आवेदनों पर सुनवाई हुई।
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अदालत से मांगा अतिरिक्त समय
माना जा रहा था कि सभी पक्ष अदालत में अपनी सहमति दर्ज कराकर दशकों पुराने विवाद का पटाक्षेप कर देंगे। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, एक पक्ष ने समझौते के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसके चलते दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। कोर्ट ने पक्षकारों की ओर से प्रस्तुत आपसी समझौते की इच्छा को देखते हुए उन्हें समय दे दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई या कोर्ट की ओर से निर्धारित अगली तारीख पर होगी। माना जा रहा है कि उसी दौरान समझौते पर अंतिम सहमति बनने के बाद संपत्ति के बंटवारे पर अदालत अपनी अंतिम मुहर लगा सकती है।
कई ऐतिहासिक संपत्तियां-परिसंपत्तियां शामिल
करीब 40 हजार करोड़ रुपये कीमत की इस पैतृक संपत्ति में जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, रानी महल, छोटी विश्रांति, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, दिल्ली का सिंधिया विला, ग्वालियर हाउस, वाराणसी का सिंधिया घाट समेत कई ऐतिहासिक संपत्तियां और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस वारिस को कौन-सी संपत्ति मिलेगी। अंतिम तस्वीर अदालत की मंजूरी के बाद ही सामने आएगी।
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चार दशक से चल रहा विवाद
करीब चार दशक से चल रही सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति विवाद की कानूनी लड़ाई अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। हालांकि आज समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी, लेकिन यदि अगली सुनवाई में सभी पक्ष सहमत हो जाते हैं, तो देश के सबसे चर्चित पारिवारिक संपत्ति विवादों में से एक का पटाक्षेप हो जाएगा।
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