संजय पाटीदार, भोपाल। भोपाल में नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 -26 के तहत शहर में सफाई अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में गंदगी और नालों की बदहाल स्थिति लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। राजधानी के कई इलाकों में समय पर सफाई नहीं होने से रहवासी नाराज हैं। लोगों का कहना है कि बारिश से पहले नालों की सफाई नहीं हुई तो जलभराव और बीमारियों का खतरा बढेगा।
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देश की सबसे स्वच्छ राजधानी स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन वहीं राजधानी भोपाल के कई इलाकों की तस्वीरें इन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। शहर में सफाई व्यवस्था और नालों की नियमित सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है.. लेकिन नगर निगम अपने काम को बखूबी नहीं कर रहा है।
पॉश इलाके नेहरू नगर सहित शहर के कई क्षेत्रों में नालों की सफाई नहीं होने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह जमा कचरा और बदबू से स्थानीय लोग परेशान हैं, जबकि आगे बारिश का समय आने वाला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नालों की नियमित सफाई नहीं कराई गई है। नालों में जमा गंदगी, प्लास्टिक और कचरा बारिश के दौरान जलभराव की बड़ी वजह बन सकते हैं। आपको बता दे कि यह समस्या केवल शहर के एक इलाकें तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई इलाकों में इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। कई क्षेत्रों में फैली गंदगी और बदहाल सफाई व्यवस्था नगर निगम के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते नालों की सफाई नहीं हुई तो जलभराव की स्थिति पैदा होगी, जिससे सड़कों और रिहायशी इलाकों में गंदा पानी भर सकता है। इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।
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अब बड़ा सवाल यही है कि जब राजधानी के प्रमुख इलाकों में ही सफाई व्यवस्था की यह स्थिति है, तो आखिर स्वच्छता अभियान और स्वच्छता सर्वेक्षण के दावे जमीन पर कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं। भोपाल में स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 का फील्ड सर्वे अप्रैल से शुरू हो चुका है, और यह करीब 45 दिनों तक चलेगा। यानी मई के आखिर तक सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है। इस दौरान सिटीजन फीडबैक, सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और जमीनी व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है।इस मामले में नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन से संपर्क करने की कोशिश की है लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
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