TATA Sons Chairman N Chandrasekaran Resigns: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कपंनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दे दिया है। चंद्रशेखरन का यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है।हालांकि वे तुरंत इस पद नहीं छोड़ेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है। तब तक चेयरमैन के पद पर बने रहेंगे। 63 साल के चंद्रशेखरन ने अपने इस फैसले की जानकारी टाटा सन्स के बोर्ड को दे दी है।

एन चंद्रशेखरन ने अपना इस्तीफा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा से मतभेद के बाद दिया है। नोएल टाटा एन चंद्रशेखरन के के कार्यकाल के विस्तार के खिलाफ थे। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि एन चंद्रशेखरन अपना कार्यकाल खत्म करने बाद हटेंगे।

बता दें कि चंद्रशेखरन 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। वे टाटा परिवार से बाहर के पहले ऐसे पेशेवर मैनेजर थे, जिन्होंने इस समूह की कमान संभाली। उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़ा। टीसीएस के प्रमुख रहे चंद्रशेखरन ने टाटा संस की कमान संभालने के बाद ग्रुप को एविएशन (एयर इंडिया का अधिग्रहण), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा। इसी का नतीजा है कि वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ हो गया। इस दौरान ग्रुप का शुद्ध मुनाफा (PAT) ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ हो गया।

चंद्रशेखरन और नोएल टाटा में मतभेद

चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद सामने आए थे। इसी साल फरवरी में चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने पर फैसला टाल दिया गया था। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने उनके दोबारा नियुक्त होने का विरोध किया था। नोएल टाटा चाहते थे कि टाटा संस भविष्य में कभी शेयर बाजार में लिस्ट न हो, लेकिन चंद्रशेखरन इस शर्त पर सहमत नहीं थे।

एजीएम वोटिंग पर सस्पेंस

वहीं 18 अगस्त को होने वाली कंपनी की सालाना बैठक (AGM) में चंद्रशेखरन को बोर्ड में दोबारा डायरेक्टर चुने जाने पर वोटिंग होनी है। अगर वह डायरेक्टर नहीं रहते, तो चेयरमैन के पद पर बने रहना भी मुश्किल हो सकता है। फरवरी 2024 में बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में नोएल टाटा ने केवल 2 साल के कार्यकारी कार्यकाल की वकालत की।

रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट के अंदर बढ़े मतभेद

बता दें कि रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ग्रुप के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे थे। कई ट्रस्टी पद छोड़ चुके हैं और सीनियर सरकारी अधिकारियों ने भी ट्रस्टियों को सलाह दी थी कि उनके आपसी मतभेद का असर ग्रुप की कंपनियों के कामकाज पर न पड़े। कई अधिकारियों और एग्जीक्यूटिव्स ने चिंता जताई थी कि इस खींचतान से ग्रुप के महत्वपूर्ण फैसलों में देरी हो रही है।

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