राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गए हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर उठे सवालों के बीच संगठन को मजबूत करने के लिए 55 नए जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस नई टीम के जरिए पार्टी की रणनीति में साफ तौर पर बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें यादवों के मुकाबले गैर-यादव, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
जिलाध्यक्ष पद के लिए कड़े नियम और चार प्रमुख आधार
जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर राजद के सभी नेताओं ने पूरी जिम्मेदारी तेजस्वी यादव को सौंप दी है। इसके तहत प्रत्येक जिले से चार-चार संभावित नाम मंगाए गए हैं, जिन पर मंथन जारी है। पटना ग्रामीण, पश्चिम चंपारण के बाद भागलपुर और मोतिहारी के नेताओं के साथ बैठकों का दौर चल रहा है। तेजस्वी इस बार कुल चार मुख्य पैमानों पर अपनी नई टीम तैयार कर रहे हैं:
- पार्टी निष्ठा और अनुशासन: चुनाव के दौरान भितरघात और अनुशासनहीनता से सबक लेते हुए तेजस्वी ऐसे चेहरों को तरजीह दे रहे हैं जो पूरी तरह वफादार हों। असंतुष्टों और बगावती तेवर वालों की जगह कर्मठ और विश्वासी कार्यकर्ताओं को आगे लाया जा रहा है।
- सोशल इंजीनियरिंग (A टू Z फॉर्मूला): मुस्लिम और यादव समीकरण के साथ-साथ गैर-यादव ओबीसी और 36 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को साधने पर जोर है। सीमांचल में एआईएमआईएम और बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज को मिले मुस्लिम वोटों से बढ़ी चिंता को देखते हुए पार्टी अपनी सोशल इंजीनियरिंग को हर क्षेत्र के हिसाब से बदल रही है।
- युवाओं को प्राथमिकता: नई टीम में 34 से 40 वर्ष की उम्र के ऊर्जावान नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। वहीं, 55 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं के लिए जिलाध्यक्ष बनना बेहद मुश्किल होगा।
- बेदाग छवि: विवादों से दूर और स्थानीय स्तर पर साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं को ही टीम में जगह दी जाएगी ताकि जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाए।
पदों के समीकरण और आंतरिक विरोध
इस पूरी कवायद के बीच पार्टी के भीतर से ही कुछ मुद्दों पर आवाजें उठने लगी हैं। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी बैठक के दौरान मांग उठाई है कि जिलाध्यक्षों के चयन में किसी तरह का आरक्षण लागू न किया जाए, बल्कि सिर्फ मजबूत और जिताऊ नेतृत्व को चुना जाए। इसके बावजूद पार्टी का मुख्य फोकस यादवों के पदों को कुछ हद तक कम करके अन्य जातियों को जोड़ना है, ताकि संगठन का दायरा व्यापक हो सके।



