कुंदन कुमार, पटना। प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने सीवान में हुई गोलीबारी की घटना पर कड़ा रोष जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। डीजीपी से मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए तेजस्वी यादव ने सरकार पर कई तीखे और गंभीर सवाल खड़े किए।

किसके आदेश पर चलाई गई एके-47?

​तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सीवान में एक निर्दोष छात्र के ऊपर एके-47 जैसे घातक हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि आखिर यह गोली किसके आदेश पर चलाई गई? तेजस्वी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा या तो इस बात का आदेश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिया होगा या फिर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने। इस बात का जवाब आखिरकार कौन देगा? उन्होंने मुख्यमंत्री की इस मामले पर चुप्पी को लेकर भी जोरदार हमला बोला और पूछा कि इस गंभीर घटना पर मुख्यमंत्री अब तक चुप क्यों हैं और वह जनता या पीड़ित परिवार को जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं?

​बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग और राहुल गांधी से अपील

​नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस घटना में शामिल बड़े अधिकारियों पर अभी तक किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई है? उन्होंने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से भी बातचीत की है। उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया है कि वे खुद बिहार आएं और सीवान के उस पीड़ित छात्र से मिलें ताकि उन्हें खुद जमीनी हकीकत का पता चल सके। तेजस्वी ने कहा कि वे देखना चाहते हैं कि कैसे यहां की सरकार छात्रों पर एके-47 जैसे खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करवाती है और उसके बाद इस पर पूरी तरह चुप्पी साध लेती है।

​डीजीपी की प्रतिक्रिया पर जताया संदेह

​तेजस्वी यादव ने बताया कि उन्होंने आज डीजीपी महोदय को एक औपचारिक पत्र सौंपा है और मांग की है कि सीवान गोलीकांड के मामले में उन बड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जिन्होंने छात्रों पर गोली चलवाने का आदेश दिया था। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि डीजीपी ने इस पर क्या आश्वासन दिया तो तेजस्वी ने कहा कि डीजीपी ने मामले को दिखवाने की बात कही है लेकिन उन्हें नहीं लगता कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठा पाएगा। उनका तर्क था कि चूंकि यह गोलीबारी बड़े लोगों के इशारे और आदेश पर हुई है इसलिए निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद बेहद कम है।
​इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात और तीखे बयानों के बाद बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर सबसे केंद्र में आ गया है और विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।