Dharm Desk- सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश एक ऐसा ज्योतिषीय परिवर्तन है, जो सीधे तौर पर प्रकृति, मौसम और मानव जीवन तीनों को प्रभावित डालता है. इसी दिन से नौतपा की शुरुआत मानी जाती हैं, वो 9 दिन जब धरती आग की तरह तपती है, लेकिन इस तपिश के बीच ज्योतिष संकेत देता है कि कुछ राशियों के लिए यही समय धन, तरक्की और खुशियों का द्वार भी खोल सकता है.

नौतपा की शुरुआत कब से होगी
ज्योतिषीय गणना बताती है कि 25 मई को दोपहर 3.44 मिनट पर सूर्य देव कृतिका नक्षत्र से निकलकर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इसी के साथ नौतपा शुरू होगा, जो 2 जून तक रहेगा. मान्यता है कि इन 9 दिनों में सूर्य का रौद्र रूप देखने को मिलता है. गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है.
आखिर क्यों खास है रोहिणी नक्षत्र का गोचर
रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि में आता है. जिसके स्वामी शुक्र हैं. नक्षत्र के अधिपति चंद्रमा है. दोनों ही ग्रह शीतलता और सौंदर्य के प्रतीक माने जाते है, वहीं सूर्य अग्नि और ऊर्जा के कारक है. जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करते है, तो उनकी उग्र ऊर्जा वातावरण को असंतुलित कर देती है. जिससे भीषण गर्मी बढ़ती है.
सूर्य-शुक्र की टकराहट बढ़ाती है भीषण गर्मी
सूर्य और शुक्र परस्पर विरोधी ग्रह है, सूर्य जहां तप और अनुशासन का प्रतीक है. वहीं शुक्र सुख और भोग-विलास का कारक है. रोहिणी में सूर्य का प्रवेश इन दोनों ऊर्जाओं के टकराव का संकेत माना जाता है, जिससे वातावरण में तीव्र गर्मी महसूस होती है.
तपिश के बीच किस्मत का साथ भी मिलेगा
जहां एक ओर नौतपा लोगों को गर्मी से बेहाल करने वाला है, वहीं कुछ राशियों के लिए यह समय बेहद शुभ संकेत लेकर आएगा. करियर में उन्नति, धन लाभ और नए अवसर मिलने के योग बन सकते है. जिसमें मेष, वृषभ, सिंह और कन्या राशि वालों के लिए यह समय बेहतर होने वाला है यानी यह दौर सिर्फ तपन ही नहीं, बल्कि तरक्की का भी संकेत है.
क्या करें, ताकि मिले सूर्य की कृपा
इस अवधि में सुबह सूर्योदय के वक्त तांबे के लोटे से जल में लाल चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. ओम घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए, और गेहूं, गुड़ या तांबे का दान करना शुभ माना गया है. इस पूरी अवधि में अहंकार, क्रोध और बड़ों के अपमान से बचने की सलाह दी जाती है.

