10 मई 2026 को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ‘सत्ता का भूखा’ और ‘विश्वासघाती’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में अपने लंबे समय के सहयोगी DMK की पीठ में छुरा घोंपा है और अवसर मिलते ही उनका साथ छोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक के बेंगलुरु में द आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन (The Art of Living Foundation) की 45वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को संबोधित कर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और पार्टी को अवसरवादी करार दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सिर्फ विश्वासघात करना आता है.
पीएम मोदी ने कहा कि 25-30 सालों तक साथ रहने और संकट के समय मदद करने वाली DMK को कांग्रेस ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए छोड़ दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कांग्रेस को ‘अवसरवादी’ और ‘विश्वासघाती’ करार दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता की लालच में DMK की पीठ में छुरा घोंपा. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस को महिला विरोधी भी बताया.
अपने संबोधन में पीएम ने तमिलनाडु में हुए घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर तीखे हमले किए. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति को ही देख लीजिए. 25 से 30 सालों तक कांग्रेस और DMK के बीच घनिष्ठ संबंध रहे. DMK के साथ गठबंधन ने कई बार कांग्रेस को संकटों से उबारा 2014 से पहले दस वर्षों तक कांग्रेस द्वारा चलाई गई सरकार काफी हद तक DMK के समर्थन के कारण ही टिकी रही. लेकिन, जिस DMK ने लगातार कांग्रेस के उत्थान के लिए काम किया, उसे राजनीतिक हवा का रुख बदलते ही धोखा दे दिया गया.
पीएम ने कहा कि सत्ता की लालसा में चूर कांग्रेस ने पहले ही मौके पर डीएमके की पीठ में छुरा घोंपा. उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एक और पार्टी की जरूरत है, जिसके सहारे वह आगे बढ़ सके. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पहचान आज एक परजीवी पार्टी की बन गई है और इसलिए वो पहला मौका मिलते ही अपने साथियों के साथ भी विश्वासघात करती है. इसलिए ही कहते हैं कि ऐसा कोई सगा नहीं जिसे कांग्रेस ने ठगा नहीं.
अपने संबोधन में पीएम ने कहा ‘जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय, यहां की सरकार अपना अधिकांश समय आंतरिक विवादों को सुलझाने में व्यतीत कर रही है. अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि मुख्यमंत्री कितने समय तक पद पर बने रहेंगे. यहां तक कि (केरल में) अभी भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे हैं. वे अपने ही पार्टी नेताओं से वादे करते हैं और फिर उन्हें धोखा देते हैं. छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी यही हुआ. कर्नाटक में भी यही खेल जारी है. अब केरल की बारी है’.
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