हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में जमीन कब्जे का विवाद अब केवल दो पक्षों के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने पुलिस की कार्यप्रणाली और भूमाफियाओं के कथित नेटवर्क पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भूरी टेकरी स्थित डायमंड कॉलोनी में करीब 17 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद में पुलिस टीम पर हमले और पुलिसकर्मियों की पिटाई की चर्चाओं ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।

बताया जा रहा है कि जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है उसकी कीमत करीब 500 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। विवाद की सूचना मिलने के बाद डायल-100 पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। आरोप है कि जमीन की निगरानी कर रहे लोगों और उनके साथियों ने न केवल दूसरे पक्ष के लोगों के साथ मारपीट की बल्कि पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की। मौके पर जमकर हंगामा हुआ और हालात काफी देर तक तनावपूर्ण बने रहे।

पुलिस पर हमला हुआ तो कार्रवाई क्यों नहीं?

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट हुई तो आरोपियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? पुलिस जवानों के घायल होने की चर्चा के बावजूद अब तक किसी बड़े एक्शन की जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर पुलिसकर्मियों की कथित पिटाई के बाद भी इंदौर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक रूप से कुछ बोलने से क्यों बच रहे हैं? मामले की जानकारी लेने के लिए कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। दूसरी ओर यह भी बताया जा रहा है कि मोहसिन नामक एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लेकर कथित रूप से मारपीट की थी। बताया जाता है कि उक्त व्यक्ति ने थाना प्रभारी पर लेन-देन से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए थे। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

500 करोड़ की जमीन पर आखिर किसकी नजर?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है उसकी कीमत लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि इस जमीन पर कब्जे को लेकर कई पक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र में लंबे समय से भूमाफियाओं की सक्रियता की चर्चाएं होती रही हैं और अब यह मामला एक बार फिर उन्हीं आरोपों को हवा देता नजर आ रहा है।

चर्चा यह भी है कि इस बहुमूल्य जमीन पर प्रभावशाली लोगों की नजर है और इसी कारण विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इलाज हुआ, लेकिन MLC क्यों नहीं?

मामले में एक और बड़ा सवाल सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार जिन पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, उनका इलाज तो कराया गया लेकिन कथित रूप से उनकी एमएलसी नहीं कराई गई। यदि यह सही है तो यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है। आखिर घायल पुलिसकर्मियों की मेडिकल लीगल प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? यदि पुलिस पर हमला हुआ था तो उसके दस्तावेजी साक्ष्य कहां हैं? और यदि हमला नहीं हुआ तो फिर पुलिसकर्मियों के घायल होने की चर्चा कैसे सामने आई? सूत्रों के मुताबिक पुलिसकर्मी आशीष शर्मा के सिर में चोट आई है, जबकि विजय सिकरवार को भी गंभीर चोट लगने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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