न्यामुद्दीन अली, अनूपपुर। नगरपालिका कोतमा में स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर के वार्ड क्रमांक 10,11,12 के बीच स्थित कचरा डंपिंग यार्ड अब केवल गंदगी का ढेर ही नहीं रह गया बल्कि इलाके के लिए धीमा जहर बन चुका है। यहां कचरे में लगाई जाने वाली आग से उठ रहा जहरीला धुआं और सड़ांध सीधे लोगों की सेहत पर प्रहार कर रही है।

फेफड़ों की बीमारी और सांस का संकट

कॉलोनी के बीच में बने डंपिंग यार्ड में भारी मात्रा में प्लास्टिक और सड़े हुए कचरे को जलाया जा रहा है। जिससे इलाके में जहरीला धुआं हमेशा बना रहता है। स्थानीय रहवासियों के मुताबिक इस धुएं के कारण सांस लेना भी मुश्किल होता है। यही नहीं आंखों में जलन की समस्या भी बनी रहती है।

मलेरिया और संक्रमण का खतरा

हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही इन वार्डों को ‘मलेरिया ग्रसित क्षेत्र’ घोषित कर रखा है। यहां हर साल सरकारी स्तर पर मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानियां बांटी जाती हैं, लेकिन नगरपालिका द्वारा यहां कचरा डंप कर मच्छरों और संक्रामक बीमारियों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड तैयार किया जा रहा है।

धार्मिक स्थलों तक पहुंच रही गंदगी

जन-स्वास्थ्य के साथ-साथ यहां लोगों की आस्था को भी चोट पहुंच रही है। कॉलोनियों में ही स्थित मंदिरों के पास आवारा कुत्ते कचरे को खींचकर ले जाते हैं, इससे न केवल अशुद्धि फैल रही है बल्कि आस्था भी आहत हो रही है।

पार्षद कर चुके हैं कई बार शिकायत

पार्षदों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और कलेक्टर अनूपपुर को कई बार मामले से अवगत कराया गया। समस्या की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में चांगेरी में 10 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई, जिसके बावजूद नगरपालिका द्वारा उसी स्थान पर कचरा डंप किया जाता है।

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