० हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव ने केंद्र और प्रदेश सरकार से ईंधन पर करों में राहत देकर महंगाई कम करने की मांग की
अजय सैनी,भिवानी। हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव एवं भिवानी चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान डॉ. पवन बुवानीवाला ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पेट्रोल, डीजल तथा घरेलू रसोई गैस की कीमतों में तत्काल राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर पहुंच चुकी हैं, ऐसे में इसका लाभ आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों, किसानों और परिवहन क्षेत्र को मिलना चाहिए।
डॉ. बुवानीवाला ने कहा कि ईरान-अमेरिका तनाव कम होने और वैश्विक स्तर पर हुए समझौतों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति भी सामान्य हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक समाप्त हो गई हैं। ऐसे में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की मौजूदा ऊंची कीमतों को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्यान्न, फल-सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। वहीं रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का घरेलू बजट भी प्रभावित किया है।
डॉ. बुवानीवाला ने कहा कि व्यापारी, उद्योगपति, किसान और परिवहन क्षेत्र लंबे समय से ईंधन की बढ़ी कीमतों का बोझ उठा रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के अनुरूप उत्पाद शुल्क में राहत दे और राज्य सरकारें भी वैट में कटौती करें, ताकि आम जनता को सीधा लाभ मिल सके।
उन्होंने 1 जुलाई से कमर्शियल खरीदारों पर ईंधन खरीद संबंधी प्रतिबंध हटाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट है कि देश में ईंधन आपूर्ति सामान्य हो चुकी है। अब सरकार को अगला कदम उठाते हुए पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में कटौती करनी चाहिए।
डॉ. पवन बुवानीवाला ने केंद्र और प्रदेश सरकारों से ईंधन एवं रसोई गैस की कीमतों की तत्काल समीक्षा कर उनमें पर्याप्त कमी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई पर नियंत्रण के साथ व्यापार, उद्योग, कृषि और परिवहन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी तथा देश की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

