० ‘जिसका खेत, उसकी रेत’ नीति लागू करे सरकार, प्रभावित किसानों को मिले राहत : श्याम सुंदर बतरा
परवेज खान ,यमुनानगर। सोम नदी से सटे क्षेत्रों में बाढ़ के बाद खेतों में जमा हुई रेत किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। कई-कई फुट रेत की परत जमने से सैकड़ों एकड़ जमीन खेती के लायक नहीं रही। किसानों की इसी समस्या को लेकर कांग्रेस नेता श्याम सुंदर बतरा ने प्रभावित गांवों और खेतों का दौरा कर हालात का जायजा लिया।
दौरे के दौरान किसानों ने बताया कि सोम नदी में आई बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में रेत बहाकर लाई, जो खेतों में जमा हो गई। इससे खेती करना लगभग असंभव हो गया है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
‘जिसका खेत, उसकी रेत’ नीति की मांग
श्याम सुंदर बतरा ने कहा कि पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी ‘जिसका खेत, उसकी रेत’ नीति लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह नीति लागू नहीं कर सकती तो कम से कम किसानों को अपने खेतों से रेत निकालने के लिए परमिट जारी किए जाएं, ताकि वे अपनी जमीन को दोबारा खेती योग्य बना सकें।
प्रशासन को बुलानी चाहिए सर्वदलीय बैठक
बतरा ने कहा कि यह केवल किसानों की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की गंभीर समस्या है। जिला प्रशासन को इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों और संबंधित विभागों की बैठक बुलाकर स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि व्यावहारिक समाधान संभव नहीं है तो सरकार प्रभावित किसानों की जमीन अधिग्रहित करने पर भी विचार करे, ताकि उन्हें उचित मुआवजा और राहत मिल सके।
हर साल बढ़ सकता है संकट
कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि बाढ़ के बाद बरसाती नदियों का तल ऊंचा हो गया है, जबकि खेत नीचे चले गए हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में भी बाढ़ का खतरा और नुकसान बढ़ सकता है।
किसानों ने जताई चिंता
प्रभावित किसानों का कहना है कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। खेतों में जमी मोटी रेत की परत के कारण फसल बोना मुश्किल हो गया है और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
इस दौरान पूर्व जिला पार्षद जरनेल सिंह, विक्रम राठी, रणधीर जाट, अभि वालिया, अनिल कुमार, नूर मोहम्मद, बलिंदर राठी, नरेंद्र संधू, पूरन बलौली सहित कई किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।

