अनमोल मिश्रा, सतना। शिक्षा के मंदिर में जहां समानता और ज्ञान का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहीं धर्म आधारित भेदभाव का एक गंभीर मामला सतना से सामने आया है। जहाँ सतना की मिशनरी कृस्तुकुला स्कूल और कॉलेज में शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती को लेकर एक विवादास्पद विज्ञापन से हड़कंप मच गया है।
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प्रबंधन द्वारा निकाली गई वेकेंसी में खुले तौर पर ‘Wanted Committed Christian’ (प्रतिबद्ध ईसाइयों की आवश्यकता) स्लोगन का उपयोग किया गया है। इसका सीधा मतलब यह निकाला जा रहा है कि संस्थान में अन्य धर्मों के योग्य उम्मीदवारों के लिए कोई जगह नहीं है। शिक्षा जैसे क्षेत्र में, जहां योग्यता (Merit) सर्वोपरि होनी चाहिए, वहाँ केवल एक विशेष धर्म के लोगों को ही प्राथमिकता देना संवैधानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में है।
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जानकारों का कहना है कि किसी भी शिक्षण संस्थान में भर्ती के लिए धर्म को आधार बनाना सीधे तौर पर समानता के अधिकार का उल्लंघन है। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिक्षा का मंदिर सर्वधर्म समभाव का प्रतीक होना चाहिए, न कि किसी विशेष धर्म के प्रचार या संवर्धन का केंद्र।यह मामला उजागर होने के बाद अब प्रशासनिक हस्तक्षेप और जांच की मांग भी उठने लगी है। देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन इस ‘धर्म आधारित भर्ती’ मामले पर क्या कार्रवाई करता है।

