दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। ​सतपुड़ा की रानी कहे जाने वाले पचमढ़ी ने स्वच्छता के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक मिसाल पेश की है, जो पूरे मध्य प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। दुर्गम पहाड़ियों और पथरीले रास्तों पर कचरा प्रबंधन की चुनौती से निपटने के लिए पचमढ़ी छावनी परिषद ने प्रदेश की पहली विशेष 4-व्हील ड्राइव (4×4) कचरा गाड़ी तैयार की है।

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गाड़ी में लगा है हाइड्रोलिक सिस्टम

एसटीआर (STR) पचमढ़ी क्षेत्र के उपसंचालक संजीव शर्मा के अनुसार यह वाहन तकनीक और नवाचार का अद्भुत संगम है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इसे सामान्य गाड़ियों से अलग बनाती हैं। यह​ एक नए वाहन को मॉडिफाई कर इसे 4X4 बनाया गया है, यह उन ऊंचाइयों और तंग रास्तों के काबिल बनाया गया है, जहां साधारण ट्रक नहीं पहुंच सकते। मात्र 1.5 लाख रुपये की लागत से तैयार इस गाड़ी में हाइड्रोलिक सिस्टम लगा है, जिससे कचरा खाली करने में मानवीय श्रम की बचत होती है। कचरा ले जाते समय गंदगी बाहर न फैले, इसके लिए गाड़ी को पूरी तरह से कवर किया गया है।

कम लागत में भी बड़े बदला

​पचमढ़ी में नागद्वारी जैसे प्रसिद्ध मेलों में स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। पहले सफाई कर्मियों को काजरी जैसे दुर्गम क्षेत्रों से 20-20 किलोमीटर तक सिर पर कचरा ढोकर लाना पड़ता था। यह गाड़ी एक चक्कर में 15 से 20 लोगों का काम अकेले कर लेती है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि हमारे सफाई मित्रों का शारीरिक बोझ भी कम हुआ है। मेले के दौरान टनों कचरा जमा होता है। यह क्रांतिकारी कदम न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रहा है, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। पचमढ़ी ने सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो कम लागत में भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

संजीव शर्मा, एसटीआर उपसंचालक पचमढ़ी

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