अनिल सक्सेना रायसेन। मध्यप्रदेश के ​रायसेन जिला प्रशासन की अनदेखी और खोखले आश्वासनों से तंग आकर आखिरकार रातातलाई के ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनता दरबार में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 18 बार आवेदन देने के बाद भी जब सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने ‘अब नहीं तो कभी नहीं’ का नारा बुलंद करते हुए सांची मार्ग (कलेक्ट्रेट के सामने) पर उग्र प्रदर्शन कर चक्का जाम कर दिया।

​दलदल में तब्दील हुई जिंदगी, स्कूल जाना मुश्किल

​ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में यह मुख्य सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुकी है। कीचड़ और गड्ढों के कारण ग्रामीणों का पैदल चलना तक दूभर हो गया है, वहीं बच्चों का स्कूल जाना भी लगभग नामुमकिन हो चुका है। कई बार हादसों का शिकार होने के बाद भी जब सुध नहीं ली गई, तो ग्रामीणों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। कलेक्ट्रेट के सामने हुए इस हंगामे के कारण सांची मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

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कलेक्टर की समझाइश के बाद ग्रामीणों हुए शांत

हंगामे और चक्का जाम की खबर मिलते ही कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने उग्र प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को शांत कराया और सड़क निर्माण का ठोस आश्वासन दिया। कलेक्टर की समझाइश और जल्द कार्रवाई के वादे के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया। लेकिन इस मामले ने सरकारी योजनाएं ओर उनका क्रियान्वयन धरातल में कितनी कारगार साबित हो रही है इसकी भी पोल खुल कर सामने आ गई हैं। हम 18 बार जनता दरबार में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हमारी कोई नहीं सुनता। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बीमारों को अस्पताल ले जाना आफत है। जब तक ठोस काम शुरू नहीं होता, हमारा आक्रोश थमेगा नहीं।

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