सुजान उइके, अमरवाड़ा। करोड़पति बनने और तंत्र-मंत्र के चक्कर में वन्यजीव तस्करों द्वारा राष्ट्रीय पशु बाघ के शिकार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के हर्रई में करीब एक महीने पहले तस्करों ने बाघ का शिकार कर उसके अंगों की तस्करी की पूरी बिसात बिछा ली थी।
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वनाधिकारियों ने खुद ‘सौदागर’ बनकर बिछाया जाल
पूर्व वन मंडल अधिकारी (DFO) स्वरूप दीक्षित ने बताया कि जैसे ही विभाग को बाघ के शिकार और उसके अवशेष बेचने की भनक लगी, वन विभाग ने एक अनोखी रणनीति अपनाई। विभाग के कुछ कर्मचारियों को नकली ‘सौदागर’ बनाकर आरोपियों के पास भेजा गया। तस्करों ने शुरुआत में बाघ की खाल और अन्य अंगों के बदले 1 करोड़ रुपये की मोटी रकम मांगी थी लेकिन बातचीत के बाद सौदा 30 लाख रुपये में तय हुआ। जैसे ही डील पक्की होने का इशारा मिला, वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर चारों आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया।
नरसिंहपुर के जंगलों में दफनाए थे अवशेष
गिरफ्तारी के बाद जब आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उनकी निशानदेही पर वन अमले ने नरसिंहपुर जिले के करेली रेंज के जंगलों में जाकर गड्ढा खुदवाया। आरोपी शिकार के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बाघ के बचे हुए अवशेषों को वहां जमीन में दफन कर चुके थे, जिन्हें वन विभाग ने बरामद कर लिया है।
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पूरी टीम को किया जाएगा पुरस्कृत
इस पूरी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने में एसडीओ (SDO) अनादि बुधोलिया और रेंजर कीर्ति बाला गुप्ता ने अपनी टीम के साथ मुख्य भूमिका निभाई। डीएफओ स्वरूप दीक्षित ने इस बड़ी सफलता पर खुशी जताते हुए ऐलान किया है कि वन्यजीव तस्करों के इस खतरनाक गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पूरी टीम को पुरस्कृत किया जाएगा। फिलहाल पुलिस और वन विभाग इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि इस शिकार के पीछे कहीं “धन वर्षा” और “तंत्र-मंत्र” का कोई बड़ा रैकेट तो काम नहीं कर रहा था।

