Dharm Desk – धार्मिक ग्रंथो में भगवान शिव से जुड़े ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जिसे गंभीर से गंभीर बीमारी नहीं ठीक की जा सकती है। ये उपाय श्रद्धा पर आधारित होते हैं। शरीर के किसी अंग में गांठ हो गई हो या कोई बहुत बड़ी और असाध्य बीमारी हो गई हो तो उसे चिकित्सीय इलाज के साथ-साथ भगवान शंकर का यह विशेष उपाय पूरी श्रद्धा से नियमपूर्वक करना चाहिए। इस उपाय को करने के लिए व्यक्ति को मंदिर जाते समय अपने साथ 5 बेलपत्र और एक लोटा जल लेकर जाना चाहिए। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने के लिए भगवान शंकर की पुत्रियों और परिवार के विभिन्न स्थानों का ध्यान रखा जाता है।

  1. पहला दिन (अशोक सुंदरी )पहला बेलपत्र जया शिव शंकरा कहते हुए शिवलिंग पर स्थित अशोक सुंदरी के स्थान पर चढ़ाए।
  2. दूसरा दिन (गणेश जी ) दूसरा बेलपत्र विषहरा शिव शंकरा का स्मरण करते हुए भगवान श्री गणेश जी के स्थान पर चढ़ाए।
  3. तीसरा दिन (कार्तिकेय जी) तीसरा बेलपत्र शामलीबारी शिव शंकरा कहते हुए भगवान कार्तिकेय के स्थान पर चढ़ाएं।
  4. चौथा दिन (माता पार्वती ) चौथा बेलपत्र दोतली शिव शंकरा का नाम लेकर जगदम्बा माता पार्वती जी के हस्तकमल (पीठिका) पर चढ़ाए।
  5. पांचवां दिन (शिवलिंग पर) पांचवां बेलपत्र देव शिव शंकरा कहते हुए सीधे शिवलिंग पर चढ़ा दे।

जल चढ़ाने और प्रसाद की विधि

जल से भरा लोटा लेकर इन पांचों स्थानों पर धीरे-धीरे जल चढ़ाए। जल चढ़ाते समय अपने शरीर की बीमारी और रोगों को याद करते हुए मन ही मन महादेव से प्रार्थना करें।

जल चढ़ाने के बाद, चढ़ाए गए 5 बेलपत्रों में से रोजाना एक बेलपत्र प्रसाद के रूप में घर ले आएं।

पहला दिन: गणेश जी/अशोक सुंदरी वाले स्थान से बेलपत्र लाएं।

दूसरे से पांचवें दिन: क्रम के अनुसार क्रमशः अगले-अगले स्थान का बेल पत्र लाएं। इस बेलपत्र को सुबह खाली पेट चबाकर खाएं और जल का थोड़ा सा भाग आचमन करें। साथ ही महादेव से अपनी बीमारी को दूर करने की विनय करें।