प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में हुई प्री-मानसून की पहली झमाझम बारिश ने जहां पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से लोगों को राहत दी है वहीं नगर निगम और प्रशासनिक दावों की कलई खोलकर रख दी है। पहली ही बारिश में शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए। सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाला वाकया केडी गेट चौराहे पर सामने आया, जहां जलजमाव के बीच अचानक करंट फैल गया। जिससे लगभग 12 बकरों की मौत हो गई। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।

पहली ही बारिश में डूबीं शहर की सड़कें

शनिवार सुबह और दोपहर में हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई क्षेत्रों में भारी जलजमाव की स्थिति निर्मित हो गई। नई सड़क, कंठाल चौराहा और इंदौर गेट जैसे व्यस्ततम इलाकों की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को निकलने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

लापरवाही का ‘करंट’: बेजुबानों की गई जान, बड़ी जनहानि का डर

केडी गेट चौराहे पर पानी भरने के साथ ही बिजली के पोल या खुले तारों के संपर्क में आने से पानी में करंट फैल गया। इसकी चपेट में आने से 12 बकरों की मौके पर ही मौत हो गई। गनीमत रही कि कोई इंसान इसकी चपेट में नहीं आया, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था।

इसके अलावा शहर में चल रहे सीवरेज और ड्रेनेज के काम ने जनता की आफत और बढ़ा दी है। कई इलाकों में नाले, चेंबर और गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं। बारिश का पानी भरने के कारण ये जानलेवा गड्ढे सड़कों पर दिखाई नहीं दे रहे हैं जो कभी भी किसी बड़ी जनहानि या हादसे का कारण बन सकते हैं।

बेपरवाह नगर निगम और सीवरेज कंपनी पर फूटा गुस्सा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून सिर पर होने के बावजूद न तो नगर निगम प्रशासन सुध ले रहा है, न ठेकेदार और न ही सीवरेज कंपनी के जिम्मेदार। खुले पड़े चेंबरों को बंद करने की जहमत तक नहीं उठाई गई है।

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