देहरादून. कर्णप्रयाग की घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का बयान सामने आया है. उन्होंने एफआईआर को लेकर सवाल खड़ा किया है. उनका कहना है कि कर्णप्रयाग की घटना में तीर्थयात्री पक्ष की एफआईआर को उनकी मांग पर हरिद्वार स्थानांतरित किया जाना समझा जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या घायल स्थानीय होटल व्यवसायियों और स्थानीय लोगों ने भी अपने मामलों की जांच हरिद्वार स्थानांतरित करने की मांग की है?

इसे भी पढ़ें- कर्णप्रयाग गुरुद्वारा निहंग विवाद में FIR, घायल श्रद्धालु के पिता ने दी तहरीर, जानिए क्या है पूरा मामला

आगे गणेश गोदियाल ने कहा, यदि पीड़ित पक्ष ने ऐसी कोई मांग नहीं की तो सरकार और प्रशासन आखिर किसके हित में यह फैसला ले रहे हैं? स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी और उन्हें न्याय से दूर करना स्वीकार्य नहीं है. सरकार स्पष्ट करे कि स्थानीय पीड़ितों के मामलों को हरिद्वार भेजने का निर्णय किस आधार पर लिया गया. यह किसी दल का नहीं, बल्कि न्याय और उत्तराखंड के स्वाभिमान का विषय है. सभी राजनीतिक दलों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर पीड़ितों की अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए. उत्तराखंड के हितों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.

इसे भी पढ़ें- नगरासू स्थित गुरुद्वारे की छत से उतरे निहंग, स्थिति सामान्य, इंटरनेट सेवा भी शुरू

क्या है पूरा मामला

16 जून 2026 को जनपद चमोली के कर्णप्रयाग में सिख श्रद्धालु एवं स्थानीय व्यक्तियों के मध्य विवाद के पश्चात मारपीट की घटना हुई. इस मामले में सिख श्रद्धालुओं के विरुद्ध थाना कर्णप्रयाग में अभियोग पंजीकृत हुआ था. घटना में घायल सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत पर उनके साथ कथित मारपीट करने वाले अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध 20 जून 2026 को थाना कर्णप्रयाग में एफआईआर दर्ज की गई है.