देहरादून. पूर्व सीएम हरीश रावत ने बिना किसी का नाम लिए बबूल के पेड़ से तुलना कर दी है. हरीश रावत ने कहा कि बोया पेड़ बबूल का. आज उत्तराखंड की राजनीति में बहुत सारे बबूल के वृक्ष खड़े हो गए हैं और वो सारे राज्य पर छा जाने का प्रयास कर रहे हैं. राज्य की राजनीति को अपने आगोश में जकड़ लेना चाहते हैं. इन बबूल के वृक्षों ने आम आदमी के साधनों को हड़प कर राजनीति के सहारे अकूत धन कमा लिया है, इस धन का दुरुपयोग कर राज्य की समस्त सत्ता को अपने कब्जे में ले लेना चाहते हैं.

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आगे हरीश रावत ने कहा कि राजनीति और उत्तराखंड पर पूरा कब्जा करना चाहते हैं. इनका उत्तराखंड और उत्तराखंड के आमजन के सम्मुख खड़े सवालों से भी कोई वास्ता नहीं है. इनका वास्ता पहले धन कमाने से था और अब सत्ता पर कब्जा करके धनाधीश के साथ सत्ताधीश होने का भी है.

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आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि जब तक आम आदमी की शक्ति इन चुनावों में नहीं दिखाई देगी, ऐसे लोग नहीं दिखाई देंगे जो जनता के सरोकारों से जुड़े हुए हैं, जो धरातल से जुड़े हुए हैं, जो ज़मीन के दुख-दर्द की बात को समझते हैं और उसकी बात करते हैं. जब तक ऐसे लोग आगे नहीं आएंगे, हमारा मंगल होने वाला नहीं है. ऐसे लोगों को आगे लाने का अवसर 2027 है. आपके मध्य ऐसे लोग हैं, सिर्फ आपको उन्हें पहचानना है तथा उनको शक्ति देनी है. धन और प्रचार तंत्र के प्रलोभन से बचना है.