देहरादून. मनरेगा को खत्म करने और मजदूरों को उनके हक का पैसा न देने का आरोप लगाते हुए यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है. उन्होंने कहा, BJP सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) तो ख़त्म कर दी, ग्रामीण भारत से ‘काम का अधिकार’ छीन लिया, पर क्या ये सच नहीं है कि राज्य सरकारों को मनरेगा का बकाया नहीं दिया. लोकसभा में प्रस्तुत उत्तर के अनुसार, 34 राज्यों व UTs का ₹17,144.13 करोड़ बकाया था. (मार्च 2026 तक) इसमें Wage Liability का आंकड़ा ₹7,846.25 करोड़ है, यानि मज़दूरों को उनके हक़ का पैसा अब तक नहीं मिला, क्यों?

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आगे यशपाल आर्य ने कहा, जुलाई 1 से आपने राज्यों पर नई योजना (VB-G RAM G) थोपी है, पर मनरेगा का बकाया भुगतान अभी तक केंद्र से नहीं मिला! कर्नाटक के ₹700 करोड़ बाक़ी हैं, झारखंड के ₹900 करोड़ बचे हैं, तेलंगाना, तमिलनाडु समेत कई राज्यों को बकाया फ़ंड नहीं मिले हैं. कांग्रेस द्वारा लाई गई मनरेगा में केंद्र सरकार मजदूरी का 100% खर्च खुद उठाती थी, लेकिन अब नई योजना में राज्यों पर कुल खर्च का 40% बोझ डाल दिया गया है. जब BJP शासित मध्य प्रदेश और बिहार, साथ ही झारखंड भी भारी वित्तीय बोझ का हवाला देते हुए फंडिंग पैटर्न पर पुनर्विचार की माँग कर रहे हैं, तो केंद्र सरकार आखिर किस बात पर अड़ी हुई है?

आगे उन्होंने कहा, जब खेती के सबसे अहम सीज़न में 60 दिनों तक काम बंद रखने के ‘Blackout’ प्रावधान का कई राज्यों ने कड़ा विरोध किया है, तो केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर यह मज़दूर-विरोधी व्यवस्था क्यों थोप रही है? जब 125 दिनों के रोज़गार का वादा पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश पर ₹20,037 करोड़ और बिहार पर ₹15,939 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, तो क्या केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक संकट में धकेलकर अपनी योजना लागू करना चाहती है?

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यशपाल आर्य ने ये भी कहा कि कम से कम 5 राज्यों ने मज़दूरी बढ़ाने की गुहार लगाई है. कांग्रेस पार्टी पहले दिन से ₹400 रोज़ाना मज़दूरी की मांग कर रही है. जब बिहार ₹255 की मजदूरी को बढ़ाकर ₹413 और जम्मू-कश्मीर ₹272 से ₹311 करने की मांग कर रहा है, तो केंद्र सरकार मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी देने में हिचकिचा क्यों रही है? जून में इस बार 42% कम बारिश हुई है. ख़रीफ़ की बुआई 22.7% कम हुई है. 300 से ऊपर ज़िले सूखे की चपेट में आ सकते हैं, ग्रामीण भारत में जीवनयापन का संकट गहराया है. इस स्थिति में मनरेगा को ख़त्म करना, क्या मज़दूर, SC, ST, OBC, व ग़रीबों पर हमला नहीं है?