लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार जल संरक्षण के अनूठे संदेश का माध्यम बना। बाजार में जहां एक ओर रंग-बिरंगी और महंगी राखियों की भरमार है। वहीं गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम देवरी द निवासी पर्यावरण प्रेमी एवं जल प्रहरी भोज साहू ने अपने अस्तित्व खो रहे ऐतिहासिक कुओं को बचाने और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से राखी तैयार की है।

इस विशेष राखी को उनकी बहन फलेश्वरी साहू ने भाई की कलाई पर बांधकर जल संरक्षण का संदेश दिया। राखी के आकर्षक डिजाइन के बीच ऐतिहासिक कुएं का चित्र बनाया गया है। इसमें “मैं ऐतिहासिक धरोहर कुआं हूं”, “जल ही जीवन है” और “जल है तो कल है” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया है।

कुआं पूर्वजों की अनमोल धरोहर

भोज साहू का कहना है कि कुआं हमारे पूर्वजों की अनमोल धरोहर है। एक समय था, जब गांवों में लोग इन्हीं कुओं का पानी पीने के लिए उपयोग करते थे और कुएं ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करते थे। आज आधुनिक दौर में अधिकांश लोग बोरिंग और नल के पानी पर निर्भर हो गए हैं। इसके कारण कुओं का उपयोग और रखरखाव धीरे-धीरे कम होता गया, जिससे अनेक पारंपरिक कुएं अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कुआं केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जल संरक्षण और भूजल संवर्धन का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। बारिश के पानी को जमीन में समाहित करने में कुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके माध्यम से वर्षाजल जमीन में पहुंचकर भूजल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करता है। इसलिए कुओं को बचाना केवल पुरानी धरोहर को बचाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

भोज साहू पिछले करीब 15 वर्षों से पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। विशेष रूप से वे कुओं के संरक्षण के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। बालोद जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं जिला मुख्यालय में कुओं का रंग-रोगन कर उन्हें आकर्षक स्वरूप दिया गया तथा जल संरक्षण और कुआं बचाओ जैसे स्लोगन लिखवाकर लोगों का ध्यान इन पारंपरिक जलस्रोतों की ओर आकर्षित किया गया।

इसी क्रम में डोंगरगांव नगर में करीब 30 कुओं को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बंद पड़े कुओं की साफ-सफाई एवं रंग-रोगन के साथ उन पर जल संरक्षण के संदेश लिखवाए गए, ताकि ऐतिहासिक एवं पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के प्रति लोगों में जागरूकता आए। जल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष रूप से काम करने के लिए केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल प्रहरी सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ के कुओं के संरक्षण को लेकर भोज साहू ने राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा था। इसके बाद राज्यपाल की ओर से मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया था।

भोज साहू पिछले करीब 10 वर्षों से “कबाड़ से जुगाड़” की थीम पर विभिन्न अवसरों पर बड़ी एवं आकर्षक राखियां बनाकर सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण के संदेश देते आ रहे हैं। इस बार उन्होंने तितली के आकार की राखी तैयार कराकर जल एवं पर्यावरण संरक्षण को रक्षाबंधन से जोड़ा है।

रक्षाबंधन के अवसर पर भोज साहू ने अपनी बहन को लाल चंदन का पौधा उपहार में दिया, जिसे भाई-बहन मिलकर अपने खेत में रोपित किया। इस तरह भाई-बहन के प्रेम के पर्व को पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि रिश्तों की रक्षा के साथ प्रकृति, जल और पारंपरिक जलस्रोतों की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।

विधायक कुंवर सिंह निषाद ने की पहल की प्रशंसा

गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि रक्षाबंधन पर्व पर भोज साहू, पर्यावरण प्रेमी एवं जल प्रहरी द्वारा राखी के माध्यम से हमारे ऐतिहासिक धरोहर कुओं को बचाने का शानदार प्रयास किया गया है। मैं निश्चित रूप से इस पहल को अपने विधानसभा क्षेत्र के गांवों में आगे बढ़ाने और वहां मौजूद कुओं को बचाने के लिए जागरूकता लाने का प्रयास करूंगा।

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